बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :
भाजपा शासन में फर्जी केस में आजीवन कारावास कर न्याय की लड़ाई को रोकने की नाकाम कोशिश : RYA
RYA का युवा नेता जितेन्द्र पासवान पर फर्जी केस कर आजीवन कारावास करना न्याय के साथ अन्याय- फरहान राजा
जन आंदोलन के नेता को आजीवन कारावास, अपराधियों को जेल से छोडना लोकतंत्र के साथ मजाक : संजय मुखिया
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। आरवाईए राज्य अध्यक्ष जितेन्द्र पासवान और श्रीराम कुशवाहा को एक फर्जी केस में आजीवन कारावास करने के खिलाफ भाकपा माले का युवा संगठन आरवाईए ने बेतिया में प्रतिवाद मार्च कर सभा किया। सभा को संबोधित करते हुए आरवाईए जिला अध्यक्ष फरहान राजा ने कहा कि आरवाईए राज्य अध्यक्ष सह भाकपा (माले) नेता जितेन्द्र पासवान को गोपालगंज में एक फर्जी मुकदमे में निचली अदालत द्वारा सुनाया गया आजीवन कारावास का फैसला लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। यह फैसला पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित प्रतीत होता है। ज्ञात हो कि वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जितेन्द्र पासवान ने स्थानीय जदयू विधायक एवं वर्तमान शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को कड़ी टक्कर दी थी। मात्र लगभग 400 वोटों के अंतर से चुनाव परिणाम घोषित किया गया। तब से ही लगातार उन्हें राजनीतिक रूप से प्रताड़ित करने और जनआंदोलन की आवाज को दबाने की कोशिशें की जाती रही हैं। आगे कहा कि RYA का युवा नेता जितेन्द्र पासवान पर फर्जी केस कर आजीवन कारावास करना न्याय के साथ अन्याय हुआ है जिसका जबाब बिहार का युवा आने वाले समय में लेगा। आरवाईए जिला सचिव संजय मुखिया ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जितेन्द्र पासवान लंबे समय से गरीबों, दलितों, मजदूरों और वंचितों के हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं। जनता के इस लोकप्रिय नेता को फर्जी केस में फंसाकर आजीवन कारावास की सजा दिलाना दरअसल गरीबों की न्याय की आवाज को कुचलने का प्रयास है। लेकिन ऐसे दमनकारी कदमों से जनसंघर्ष कमजोर नहीं होगा। भाजपा जदयू सरकार के दमन के खिलाफ दर्जनों जितेन्द्र पासवान आंदोलन करने के खिलाफ तैयार होगें। आज बेतिया में इस अन्यायपूर्ण फैसले के खिलाफ व्यापक प्रतिवाद मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। मो. सद्दाम ,सलाउद्दीन, सुरेंद्र चौधरी, मंटू कुमार आदि युवा नेताओं ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह फैसला न्याय के साथ अन्याय है और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। आंदोलन को और व्यापक बनाने तथा लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया।








