बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :
करीब 880 मीटर (2,884 फीट) की ऊंचाई पर शिवालिक पर्वतमाला में स्थित सोमेश्वर शिखर बिहार के सबसे ऊंचे स्थानों में गिना जाता है
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। चैत्र नवरात्र के अवसर पर पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सोमेश्वर पहाड़ियों पर काली माता मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

भारत-नेपाल सीमा के पास वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के घने जंगलों और दुर्गम संकीर्ण पहाड़ी रास्तों से होकर यह कठिन यात्रा पूरी की जाती है। करीब 880 मीटर (2,884 फीट) की ऊंचाई पर शिवालिक पर्वतमाला में स्थित सोमेश्वर शिखर बिहार के सबसे ऊंचे स्थानों में गिना जाता है।

यहां प्राचीन काली मंदिर और ऐतिहासिक सोमेश्वर किला स्थित है। इस स्थल पर हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।यात्रा की शुरुआत रामनगर से गोवर्धन गांव तक लगभग 16 किलोमीटर की सड़क यात्रा से होती है, जिसके बाद करीब 12 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। घने जंगलों, नदियों और खड़ी ढलानों से होकर गुजरने वाली यह यात्रा 5–6 घंटे में पूरी होती है। रास्ते में परेवाड़ाह, वनेश्वर झील और नाचन चिड़िया पहाड़ी जैसे मनमोहक स्थल पड़ते हैं, जबकि धमाहवा पहाड़ी की खड़ी चढ़ाई श्रद्धालुओं की सहनशक्ति की परीक्षा लेती है। एक श्रद्धालु निरंजन प्रसाद ने कहा, “रास्ता कठिन जरूर है, लेकिन आस्था अटूट है। शिखर पर पहुंचने के बाद मिलने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा इस पूरी यात्रा को सफल बना देती है।” चढ़ाई शुरू करने से पहले श्रद्धालु गोवर्धन गांव में बाबा नरहरी दास की प्रतिमा के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि लगभग तीन दशक पहले बाबा नरहरी दास ने यहां धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत की थी। हर साल नवरात्र में यहां आने वाले हरिओम प्रसाद के अनुसार, यह स्थल 108 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। थारू समुदाय और स्थानीय ग्रामीण इस दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे पहाड़ी पर पानी और जरूरी सामान पहुंचाने के साथ-साथ नौ दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन करते हैं। कठिनाइयों और जोखिमों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था हर साल यहां बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करती है। नवरात्र के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 65वीं बटालियन, स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीमों द्वारा संभाली जाती है। कमांडेंट नंदन सिंह मेहरा ने बताया कि सुरक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं की चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। सोमवार को चढ़ाई के दौरान घायल हुए कई श्रद्धालुओं का इलाज SSB टीम ने किया। पश्चिम चंपारण के सांसद सुनील कुमार ने बताया कि इस स्थल को एक प्रमुख धार्मिक और इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने यहां बुनियादी सुविधाओं के विकास और रोपवे निर्माण की मांग की है, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुगम हो सके।”








