रिपोर्ट : छपरा डेस्क
•स्तनपान, एनीमिया और कुपोषण की रोकथाम को लेकर चलेगा जागरूकता अभियान
•08 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
•गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने की व्यवस्था
•उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान और उपचार पर भी रहेगा फोकस
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
छपरा, (रूचि सिंह सेंगर)। बच्चों, किशोर-किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार के उद्देश्य से बिहार में 09 सितंबर से 08 अक्टूबर 2026 तक राष्ट्रीय पोषण माह मनाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच, नवजात एवं छोटे बच्चों की घर पर देखभाल, स्तनपान को बढ़ावा देने, बच्चों के पोषण स्तर की जांच, एनीमिया की रोकथाम तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान और उपचार सहित कई गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सिविल सर्जन-सह-सदस्य सचिव, जिला स्वास्थ्य समिति को अभियान का शत-प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पाण्डेय, भा.प्र.से. की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि पोषण माह के दौरान संचालित सभी गतिविधियों की जिला एवं प्रखंड स्तर पर नियमित रिपोर्टिंग की जाए। संबंधित गतिविधियों की तस्वीरों सहित जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा विकसित पोषण अभियान के डैशबोर्ड पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया गया है। इसके लिए जिला, प्रखंड और आंगनवाड़ी केंद्र स्तर पर समाज कल्याण विभाग के संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों से आवश्यक सहयोग लेने को कहा गया है।
जीवन के पहले 1000 दिनों के पोषण पर जोर
डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान जीवन के पहले 1000 दिनों में समुचित पोषण को लेकर विशेष परामर्श दिया जाएगा।

गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, प्रसवपूर्व जांच और पोषण संबंधी सलाह सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि शत-प्रतिशत गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर एवं हीमोग्लोबिन की जांच ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) तथा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दौरान की जाए। गर्भावस्था की प्रथम तिमाही के बाद से प्रसव के बाद छह माह तक आयरन और कैल्शियम की खुराक उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
नवजात के घर छह-सात बार पहुंचेगी आशा :
गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल कार्यक्रम (एचबीएनसी) के तहत आशा कार्यकर्ता प्रत्येक नवजात के जन्म के 42 दिनों के भीतर छह से सात गृह भ्रमण करेंगी।

इस दौरान नवजात की देखभाल के साथ धात्री माता के पोषण और शिशु को छह माह तक केवल स्तनपान कराने के संबंध में परामर्श दिया जाएगा।
तीन से 15 माह तक के बच्चों का होगा गृह भ्रमण
गृह आधारित छोटे बच्चों की देखभाल कार्यक्रम (एचबीवाईसी) के तहत आशा कार्यकर्ता बच्चों के तीन, छह, नौ, 12 और 15 माह की उम्र पूरी होने पर गृह भ्रमण करेंगी। इस दौरान निमोनिया, दस्त जैसी बीमारियों से बचाव, कुपोषण की रोकथाम और प्रबंधन तथा बच्चों के शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक विकास को लेकर अभिभावकों को परामर्श दिया जाएगा।

छह माह तक केवल स्तनपान, छह माह की उम्र पूरी होने के बाद पूरक आहार की शुरुआत और कम से कम दो वर्ष तक स्तनपान जारी रखने के लिए परिवारों को जागरूक किया जाएगा। बच्चों को आयरन एवं फोलिक एसिड सिरप देने तथा पोषक तत्वों से समृद्ध आहार के उपयोग को लेकर भी परामर्श दिया जाएगा। एचबीवाईसी भ्रमण के दौरान चिन्हित गंभीर तीव्र कुपोषित (एसएएम) और मध्यम तीव्र कुपोषित (एमएएम) बच्चों की एएनएम द्वारा स्वास्थ्य संस्थान में जांच सुनिश्चित की जाएगी।
वीएचएसएनडी में बच्चों की होगी पोषण जांच
ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन और लंबाई मापकर उसका विवरण पोषण ट्रैकर पर दर्ज करेंगी। पोषण ट्रैकर में चिन्हित एसएएम और एमएएम बच्चों को वीएचएसएनडी स्थल पर लाकर एएनएम से स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। भूख की जांच में असफल रहने वाले अथवा चिकित्सकीय जटिलता वाले एसएएम एवं एमएएम बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजा जाएगा। अन्य बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों को घर पर कुपोषण की देखभाल के संबंध में पोषण परामर्श दिया जाएगा। आशा और आंगनवाड़ी सेविका प्रत्येक 15 दिन पर गृह भ्रमण कर बच्चों के पोषण स्तर में सुधार की निगरानी करेंगी।
स्तनपान को लेकर चलेगा विशेष जागरूकता अभियान
शिशु एवं छोटे बच्चे के आहार संबंधी कार्यक्रम (आईवाईसीएफ/मां) के तहत समुदाय स्तर पर गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के साथ बैठक कर शीघ्र स्तनपान शुरू कराने, छह माह तक केवल स्तनपान कराने तथा छह माह बाद पूरक आहार के साथ कम से कम दो वर्ष तक स्तनपान जारी रखने को लेकर जागरूक किया जाएगा। स्वास्थ्य संस्थानों में ममता कार्यकर्ता तथा आरएमएनसीएच+ए परामर्शदाता प्रसव कक्ष और स्तनपान परामर्श केंद्र पर माताओं को स्तनपान संबंधी आवश्यक सहयोग एवं परामर्श देंगे।
हर प्रखंड में एनीमिया जांच के लिए दो शिविर
एनीमिया मुक्त कार्यक्रम के तहत बच्चों, किशोर-किशोरियों और गर्भवती महिलाओं की जांच एवं आवश्यक परामर्श के लिए प्रत्येक प्रखंड में दो टी4 शिविर आयोजित किए जाएंगे।

अभियान के दौरान एनीमिया की पहचान, रोकथाम और उपचार को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।
हर माह को गर्भवती महिलाओं की जांच
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की 9, 15 और 21 तारीख को जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र और चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालों में विशेष दिवस आयोजित किया जाता है। इन अवसरों पर गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में पहुंच चुकी महिलाओं की गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच की जाएगी। महिला चिकित्सक, प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, आपातकालीन प्रसूति देखभाल में प्रशिक्षित विशेषज्ञ अथवा सामान्य चिकित्सक द्वारा गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। इसमें गर्भावस्था के दौरान वजन में वृद्धि की निगरानी समेत आवश्यक प्रयोगशाला जांच शामिल होगी। अभियान के दौरान स्वास्थ्य संस्थान पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को नाश्ता भी उपलब्ध कराया जाएगा।
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की होगी पहचान
सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान, जांच और उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, अस्पताल प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, स्टाफ नर्स, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं का क्षमता निर्माण किया जाएगा। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की जांच के दौरान हीमोग्लोबिन, एचआईवी, सिफलिस, रक्तचाप, मूत्र में एल्ब्यूमिन तथा पेट की अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी आवश्यक जांचों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य समय रहते जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर आवश्यक उपचार एवं परामर्श उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान निर्धारित सभी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करते हुए उनकी नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करें, ताकि अभियान का लाभ राज्य के प्रत्येक पात्र बच्चे, किशोर-किशोरी, गर्भवती महिला और धात्री माता तक पहुंचाया जा सके।


