वाल्मीकिनगर स्थित नरदेवी माता मंदिर में प्रातः काल से ही भक्तों की भीड़ लगी रही
नंदलाल पटेल
– अमिट लेख
वाल्मीकिनगर, (संवाददाता)। वाल्मीकिनगर स्थित नरदेवी माता मंदिर में प्रातः काल से ही भक्तों की भीड़ लगी रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार वीटीआर के घनघोर जंगल में अवस्थित नरदेवी माता मंदिर परिसर में चैत्र नवरात्र और अश्विन के नवरात्र में विशाल मेला लगता है।

नवरात्र के पहले दिन मां के प्रथम रूप शैलपुत्री माता की पूजा की गई। नवरात्र के 9 दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा होती है। सारी शक्तियां नारी के पास ही है, इसलिए हम नवरात्र की पावन वेला में दुर्गा माता की उपासना करते हैं। इतिहास प्रसिद्ध वीर बांकुड़े आल्हा ऊदल भी नरदेवी माता की पूजा अर्चना किया करते थे । जिससे उन्हें शक्ति प्राप्त होती थी। नवरात्र में मंदिर की शोभा देखते ही बनती है । कोई कपूर जलता है,तो कोई नारियल फोड़ता है तो कोई मां को चुनरी चढ़ाता है। आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होती है । मांसाहारी लोग भी नवरात्र के दौरान मीट मांस का त्याग कर देते हैं । फलाहार के साथ-साथ सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।जानकारी के अनुसार नवरात्र का समय सिद्धि और साधना के लिए महत्वपूर्ण है। दूर-दूर के साधु संत इस मंदिर परिसर मे आकर नवरात्र की पावन वेला में पूजा पाठ तपस्या और साधना करते हैं। कुछ लोग हर दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। भक्त नरदेवी माता मंदिर परिसर में 9 दिन तक अपना अमूल्य समय बिताते हैं। ऐसी मान्यता है,कि माता सब की झोलियां भरती है । प्रातः काल से ही भक्तों की भीड़ जुटी रही। नवमी तिथि को इस मंदिर परिसर में मेला लगेगा । जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है, वे कबूतर मुर्गा और बकरा छोड़ते हैं।








