प्रखण्ड मुख्यालय के सार्वजनिक बड़ी दुर्गा मंदिर की माता की महिमा अद्भुत है
न्यूज़ डेस्क, सुपौल ब्यूरो
संतोष कुमार, अनुमंडल ब्यूरो
– अमिट लेख
त्रिवेणीगंज, (सुपौल)। प्रखण्ड मुख्यालय के सार्वजनिक बड़ी दुर्गा मंदिर की माता की महिमा अद्भुत है। बड़ी संख्या में भक्तजन वैष्णवी मनोकामना पूर्णि माता के दरबार में मन्नतें पूरी करने की गुहार लगाने की भीड़ उमड़ती है। इस बर्ष सजावट के लिए 70 हजार रुपये से भव्य पंडाल निर्माण करवाया जा रहा है। बर्ष 1982-83 में पुरानी मंदिर को तोड़कर भव्य मंदिर बनाने की आधार शिला लोगों द्वारा रखी गई,जो आज भव्य रूप में विराजमान है। दिव्य ज्योति से अलौकिक मंदिर में पूरे साल पूजा पाठ करने वालों के साथ मन्नत मांगने वालों की भी भीड़ लगी रहती है। लोगों की मानें तो पूजा अर्चना के बाद भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति भी होती है।

मंदिर पूजा समिति के संयोजक मनीष सिंह एवं विनय चांद बताते हैं कि माता के दरबार में खासकर नवरात्र के सप्तमी और अष्टमी को अखंड ज्योति जलाकर कर मैया के जागरण का आयोजन किया जाता है। मैया के पास ज्योति जलाने वाले हर श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण हुई है। इस बर्ष 70 हजार रुपये से भव्य पंडाल निर्माण के साथ अष्टमी के दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम में टीवी कलाकार के शिरकत, नवमी के दिन महाप्रसाद एवं पट खुलते ही कन्या पूजन सहित अनेकों अनुष्ठान किया जाएगा। व्यापार संघ के अध्यक्ष सज्जन कुमार संत ने मंदिर के इतिहास बताते कहा कि 1966 में लोगों ने माता के मंदिर निर्माण को लेकर स्व.लक्ष्मी प्रसाद साह से जमीन मागी थी। इंकार करने पर उसी रात माता ने अपने विराट रूप से स्व.साह की पत्नी स्व.तारा देवी को स्वप्न में आकर जमीन देने का आदेश दिया। सुबह ही स्व.साह ने समाज के लोगों से जमीन न देने की माफी मागते हुए मंदिर निर्माणप्रारंभ करवाया। कालांतर में 1982-83 में पुरानी मंदिर को तोड़कर भव्य मंदिर बनाने की आधारशिला रखी गई। जो अपने भव्य रूप में विराजमान है। मंदिर स्थापना के बाद भक्तजनों ने निर्णय लिया कि माता की वैष्णवी रूप की पूजा की जाएगी। मंदिर में बलि न देने का माता से गुहार लगाई गई। इस हेतु माता का विशेष पूजन कर भगवती को मनाया गया। और तब से मनोकामना पूर्ण होने पर छाग की माता के समक्ष फुलहास कर छोड़ दिये जाने की परंपरा चली आ रही है।








