



बेतिया से उप संपादक का चश्मा :
अस्पतालों में वार्ड एवं बेड सहित दवाईयों की उपलब्धता करें सुनिश्चित
प्रत्येक बच्चा अनमोल है, एक-एक बच्चे का विशेष ख्याल रखना है
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जेई/एईएस की रोकथाम हेतु जिला टास्क फोर्स की बैठक सम्पन्न
“चमकी को धमकी“ के तीन मुख्य बातें का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने का निदेश
न्यूज़ डेस्क, जिला पश्चिम चंपारण
मोहन सिंह
– अमिट लेख
बेतिया, (ए.एल.न्यूज़)। एईएस/जेई संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने एवं इसके कुशल प्रबंधन को लेकर आज जिला पदाधिकारी, दिनेश कुमार राय की अध्यक्षता में जिलास्तरीय टास्क फोर्स की बैठक समाहरणालय सभागार में सम्पन्न हुयी। जिलास्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में जिलाधिकारी, दिनेश कुमार राय ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि जेई/एईएस (मस्तिष्क ज्वर-चमकी बुखार) की रोकथाम हेतु सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सभी व्यवस्थाएं अपडेट रखें। मेडिकल कॉलेज सहित जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट रखें।

अस्पतालों में वार्ड, बेड एवं दवा की पर्याप्त व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि सभी पीएचसी को अलर्ट मोड में रखा जाय ताकि किसी भी विषम परिस्थिति में बच्चों की जान बचाई जा सके। इसके साथ ही कम्युनिकेशन प्लान का बेहतर तरीके से इंप्लेमेंटेशन कराना सुनिश्चित करें।उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा अनमोल है, एक-एक बच्चे का विशेष ख्याल रखना है। प्रभावित बच्चा ससमय अस्पताल पहुंच जाय और उसे समुचित चिकित्सा उपलब्ध हो, इसे हर हाल में सुनिश्चित करें। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही, कोताही एवं शिथिलता कतई बर्दाश्त नहीं की जायेगी। लापरवाही, कोताही बरतने वाले डॉक्टरों एवं कर्मियों को चिन्हित करते हुए उनके विरूद्ध सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि सभी पीएचसी में जेई/एईएस से बचाव हेतु सभी आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया करें। आवश्यक दवाओं के साथ-साथ पैरासिटामोल, ओआरएस, विटामिन ए सहित ग्लूकोज भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करायें। साथ ही पर्याप्त संख्या में एम्बुलेंस की व्यवस्था, डॉक्टर, नर्सेंज की उपस्थिति आदि की समुचित व्यवस्था सभी स्वास्थ्य संस्थानों में रहनी चाहिए। सिविल सर्जन स्वयं सभी कार्यों का नियमित अनुश्रवण एवं निरीक्षण करते रहेंगे। किसी भी प्रकार की लापरवाही, कोताही एवं शिथिलता कतई बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने कहा कि जेई/एईएस एक गंभीर बीमारी है, जो अत्यधिक गर्मी एवं नमी के मौसम में फैलती है। मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाय। उन्होंने कहा कि जेई/एईएस के संभावित संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने एवं इसके कुशल प्रबंधन के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंतत्रण संगठन, आइसीडीएस, जीविका, पंचायती राज विभाग, खाद्य एवं उपभोक्ता विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा, पशुपालन विभाग, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग आदि को समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा पदाधिकारी शिक्षकों को जेई/एईएस संक्रमण एवं उसके रोकथाम के लिए विद्यालयों के बच्चों एवं उनके अभिभावकों को इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जीविका दीदियों के माध्यम से जेई/एईएस संक्रमण एवं रोकथाम के संबंध में प्रचार-प्रसार में सहभागिता सुनिश्चित की जाय। उन्होंने निदेश दिया कि आंगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं के द्वारा जेई/एईएस संक्रमण एवं रोकथाम के संबंध में सामुदायिक चेतना का प्रचार-प्रसार कराया जाय तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ओआरएस, सीरप एवं पारासिटामोल आदि की उपलब्धता सुनिश्चित की जाय। सिविल सर्जन को निदेश दिया गया कि जेई/एईएस की रोकथाम हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन सहित चमकी को धमकी से संबंधित जानकारी का व्यापक स्तर पर बुकलेट, पम्फलेट, दीवाल लेखन, नुक्कड़ नाटक, फ्लेक्स, चौपाल आदि के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराना सुनिश्चित किया जाय। बच्चों के अभिभावकों को बताएं कि कोई भी बच्चा रात में भूखा नहीं सोए, इस बीमारी के कुछ भी लक्षण दिखे तो जल्द से जल्द अस्पताल जाएं ताकि उनका समय पर ईलाज हो सके। जिलाधिकारी ने निदेश दिया कि मस्तिष्क ज्वर की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी “चमकी को धमकी” के तीन मुख्य बातें यथा-(1) खिलाओ- बच्चों को रात में सोने से पहले भरपेट खाना जरूर खिलाएं (2) जगाओ-रात के बीच में एवं सुबह उठते ही देखें कि कहीं बच्चा बेहोश या उसे चमकी तो नहीं एवं (3) अस्पताल ले जाओ-बेहोशी या चमकी दिखते ही आशा को सूचित कर तुरंत 102 एम्बुलेंस या उपलब्ध वाहन से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस की समुचित व्यवस्था कराना सुनिश्चित किया जाय। साथ ही गांव-पंचायतों से पीड़ित बच्चों को स्वास्थ्य केन्द्र पर लाने हेतु वाहनों की टैगिंग अविलंब सुनिश्चित किया जाय। उन्होंने कहा कि हर हाल में पीड़ित बच्चों को स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाया जाना है, इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही, कोताही, शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि अभिभावक अपने-अपने बच्चों को रात में बिना खाना खिलाएं नहीं साने दें। अगर कोई बच्चा शाम के समय में खाना खाया है और सो गया है तो उसे भी रात में जगाकर अवश्य खाना खिलाएं। इसके साथ ही बच्चों को रात में सोते समय अनिवार्य रूप से मीठा सामग्री यथा-गुड़, शक्कर, चीनी आदि खिलाएं। उन्होंने कहा कि चमकी बुखार अधिकांशतः रात के 02 बजे से 04 बजे के बीच अक्रामक रूप लेता है, इस समय सभी अभिभावकों को सचेत रहने की आवश्यकता है। अगर चमकी के साथ तेज बुखार हो तो तुरंत क्षेत्र के एएनएम, आशा कार्यकर्ता अथवा आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को सूचित करें। इनके माध्यम से आवश्यक दवाएं तथा प्राथमिक उपचार की जायेगी तथा नजदीकी पीएचसी में ले जाकर समुचित उपचार किया जायेगा।
मस्तिष्क ज्वर के लक्षण :
● सरदर्द, तेज बुखार आना जो 5-7 दिनों से ज्यादा का ना हो
● अर्द्ध चेतना एवं मरीज में पहचानने की क्षमता नहीं होना/भ्रम की स्थिति में होना/बच्चे का बेहोश हो जाना।
● शरीर में चमकी होना अथवा हाथ पैर में थरथराहट होना।
● पूरे शरीर या किसी खास अंग में लकवा मारना या हाथ पैर का अकड़ जाना।
● बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक संतुलन ठीक नहीं होना।
● उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखने पर अविलंब अपने गांव की आशा/एएनएम दीदी से संपर्क कर अपने सबसे निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पर जाकर चिकित्सीय परामर्श लें। इसके उपरांत ही सदर अस्पताल/मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चों को ईलाज हेतु ले जायें।
सामान्य उपचार एवं सावधानियां :
● अपने बच्चों को तेज धूप से बचाएं। घर से बाहर जाने पर सर पर टोपी या गीला गमछा रखें।
● अपने बच्चों को दिन में दो बार स्नान कराएं।
रात में बच्चों को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं।
● गर्मी के दिनों में बच्चों को ओआरएस अथवा नमक-चीनी एवं नींबू पानी से शरबत बनाकर पिलायें।
● रात में सोते समय घर की खिड़कियां एवं रौशनदान को खोल दें, ताकि हवा का आवागमन होता रहे।
ध्यान देने वाली बातें :
क्या करेंः-
● तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें एवं पंखा से हवा करें ताकि बुखार 100 डिग्री से कम हो सके।
● पारासिटामोल की गोली/सीरप मरीज को चिकित्सीय सलाह पर दें।
● यदि बच्चा बेहोश नहीं है तब साफ एवं पीने योग्य पानी में ओआरएस का घोल बनाकर पिलायें।
बेहोशी/मिर्गी की अवस्था में बच्चे को छायादार एवं हवादार स्थान पर लिटाएं।
● चमकी आने पर, मरीज को बाएं या दाएं करवट में लिटाकर ले जाएं।
● बच्चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं गर्दन सीधा रखें।
अगर मुंह से लार या झाग निकल रहा हो तो साफ कपड़े से पोछें, जिससे कि सांस लेने में कोई दिक्कत ना हो।
● तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की अंखों को पट्टी या कपड़े से ढंकें।
क्या ना करेंः-
● बच्चे को कम्बल या गर्म कपड़ों में न लपेंटे।
● बच्चे की नाक बंद नहीं करें।
● बेहोशी/मिर्गी की अवस्था में बच्चे के मुंह से कुछ भी न दें।
● बच्चे का गर्दन झुका हुआ नहीं रखें।
● चूंकि यह दैविक प्रकोप नहीं है बल्कि अत्यधिक गर्मी एवं नमी के कारण होने वाली बीमारी है अतः बच्चे के ईलाज में ओझा गुणी में समय नष्ट न करें।
● मरीज के बिस्तर पर ना बैठें तथा मरीज को बिना वजह तंग न करें।
● ध्यान रहे कि मरीज के पास शोर न हो और शांत वातावरण बनायें रखें।
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● खिलायें-बच्चे को रात में सोने से पहले भरपेट खाना जरूर खिलाएं। यदि संभव हो तो कुछ मीठा भी खिलायें।
● जगायें-रात के बीच में एवं सुबह उठते ही देखें कि कहीं बच्चा बेहोश या उसे चमकी तो नहीं।
● अस्पताल ले जायें-बेहोशी या चमकी दिखते ही आशा को सूचित कर तुरंत निःशुल्क 102 एंबुलेंस या उपलब्ध वाहन से नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र जायें।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त, सुमित कुमार, अपर समाहर्ता, विभागीय जांच-सह-जिला आपूर्ति पदाधिकारी, कुमार रविन्द्र, सिविल सर्जन, डॉ0, एसीएमओ डॉ0 रमेश चन्द्रा, जिला परिवहन पदाधिकारी, ललन प्रसाद, वरीय उप समाहर्ता-सह-जिला सूचना एवं जनसम्पर्क पदाधिकारी, श्रीमती रोचना माद्री, विशेष कार्य पदाधिकारी, जिला गोपनीय शाखा, सुजीत कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी, मनीष कुमार सिंह, डीपीओ, आइसीडीएस, श्रीमती कविता रानी, डीपीएम, जीविका, आरके निखिल सहित सभी संबंधित अधिकारी उपस्थ्ति रहे।