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Post: ‘तीस हज़ार सीड बॉल’ से हरित क्रांति की ओर पश्चिम चम्पारण

‘तीस हज़ार सीड बॉल’ से हरित क्रांति की ओर पश्चिम चम्पारण

बेतिया से उप-संपादक का चश्मा : 

जल-जीवन और पर्यावरण बचाने की अनूठी पहल

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

बेतिया, (मोहन सिंह)। पश्चिम चंपारण में पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक अभिनव जनअभियान की शुरुआत की गई है।

फोटो : मोहन सिंह

जिला पदाधिकारी, तरन जोत सिंह एवं उप विकास आयुक्त, काजले वैभव नितिन के मार्गदर्शन एवं पीओ मनरेगा अजय सहाय के सहयोग से सिकटा प्रखंड में ‘जल जीवन हरियाली’ अभियान के तहत 30 हजार सीड बॉल तैयार किए जा रहे हैं। इन सीड बॉल में 10 हजार नीम, 10 हजार पीपल और 10 हजार बरगद के बीज शामिल हैं, जिन्हें मानसून के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बिखेरा जाएगा।

छाया : अमिट लेख

उप विकास आयुक्त ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल पौधरोपण नहीं, बल्कि प्रकृति आधारित समाधान के माध्यम से बढ़ते तापमान, भूजल संकट, जैव विविधता के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में जनभागीदारी को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि मानसून की पहली बारिश के साथ ये सीड बॉल नदियों, तालाबों, आर्द्रभूमियों, वन क्षेत्रों और सड़कों के किनारे अंकुरित होकर हजारों नए वृक्षों का रूप लेंगे। यह कम लागत में अधिक क्षेत्र को हरित बनाने का प्रभावी और टिकाऊ मॉडल माना जा रहा है।

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उन्होंने बताया कि पीपल, बरगद और नीम जैसे देशी वृक्ष स्थानीय तापमान को कम करने, स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने, वर्षा जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण तथा मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही ये हजारों पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों एवं अन्य परागण करने वाले जीवों के लिए आश्रय और भोजन का स्रोत भी बनते हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि “पानी बोओ–पानी उगाओ” और “प्रकृति बचाओ–भविष्य बचाओ” की सोच को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास है। यदि पंचायतों, विद्यालयों, स्वयं सहायता समूहों, युवा मंडलों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो पश्चिम चंपारण आने वाले वर्षों में हरित, जल-समृद्ध और जलवायु-सहिष्णु जिले के रूप में नई पहचान स्थापित कर सकता है। आज तैयार हो रहे 30 हजार सीड बॉल भविष्य में लाखों पेड़ों का आधार बनेंगे और पश्चिम चंपारण की नदियों, तालाबों, जंगलों तथा गांवों को हरित सुरक्षा कवच प्रदान करेंगे।

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