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Post: बिहार में 57 लाख लोगों का राशनकार्ड से कटेगा नाम, अधिकारियों को भेजी गई सूची

बिहार में 57 लाख लोगों का राशनकार्ड से कटेगा नाम, अधिकारियों को भेजी गई सूची

पटना से हमारे विशेष ब्यूरो की रिपोर्ट : 

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन परिवारों की मासिक आय 10 हजार रुपये या उससे अधिक है या जो निर्धारित पात्रता मानकों से बाहर हैं

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

पटना, (दिवाकर पाण्डेय)। बिहार में मुफ्त राशन योजना को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन परिवारों की मासिक आय 10 हजार रुपये या उससे अधिक है या जो निर्धारित पात्रता मानकों से बाहर हैं, उन्हें अब सरकारी राशन का लाभ नहीं मिलेगा। इसी के तहत राज्यभर में राशन कार्डों की गहन जांच अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि बिहार में 57 लाख से अधिक संदिग्ध या अपात्र लाभार्थी चिन्हित किए गए हैं, जिनके नाम राशन कार्ड सूची से हटाए जाने हैं। इनमें से अब तक 30 लाख 63 हजार से अधिक लोगों के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। इस अभियान ने राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले 23.39 लाख और 2025 के चुनाव से पहले 8.5 लाख नए राशन कार्ड बनाए गए थे। यानी दो चुनावों के दौरान करीब 32 लाख नए लाभार्थी जोड़े गए, जबकि अब चुनावों के बाद 57 लाख नाम हटाने की कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है। विपक्ष इसे सियासी मुद्दा बना रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह पारदर्शिता और फर्जी लाभार्थियों को हटाने का अभियान है। राशन कार्ड रद्द होने के बाद हजारों परिवार असमंजस में हैं। कई लाभार्थियों को तब पता चल रहा है कि उनका नाम सूची से हट चुका है, जब वे जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकान पर अंगूठा लगाकर राशन लेने पहुंचते हैं। नालंदा के बिहारशरीफ निवासी रमेश बताते हैं कि वे अपनी दादी के साथ राशन लेने पहुंचे, लेकिन बायोमेट्रिक मशीन में दोनों का रिकॉर्ड नहीं मिला। इसी तरह दामोदर मिस्त्री, बेगूसराय के अशोक कुमार महतो और दरभंगा की विभा देवी ने भी बिना पूर्व सूचना राशन बंद होने की शिकायत की है।दूसरी ओर पीडीएस दुकानदारों का कहना है कि सरकार लगातार आधार लिंकिंग और केवाईसी अपडेट कराने पर जोर दे रही है। जिन लोगों ने केवाईसी नहीं कराया या जिनके परिवार में मृत सदस्यों के नाम अब भी राशन कार्ड में दर्ज थे, उनके नाम भी हटाए जा रहे हैं। कई मामलों में आर्थिक स्थिति बेहतर होने के कारण भी पात्रता समाप्त की गई है। सरकार के मानकों के अनुसार यदि किसी परिवार के पास तीन या चार पहिया वाहन है, परिवार का कोई सदस्य 10 हजार रुपये या उससे अधिक प्रतिमाह कमाता है, सरकारी नौकरी करता है, आयकर या प्रोफेशनल टैक्स देता है, गैर-कृषि व्यवसाय संचालित करता है, पक्का मकान है, पांच एकड़ से अधिक जमीन है या ट्रैक्टर, पावर टिलर अथवा मोटर पंप जैसी सुविधाएं हैं, तो ऐसे परिवार मुफ्त राशन योजना के पात्र नहीं माने जाएंगे। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अनुसार अररिया, अरवल, औरंगाबाद, बांका, गोपालगंज, जमुई, किशनगंज, लखीसराय, मधुबनी, नवादा, रोहतास, सहरसा, समस्तीपुर और शेखपुरा सहित 14 जिलों में अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं पटना, गया, सारण, सीवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, दरभंगा और भागलपुर जैसे जिलों में सबसे अधिक संदिग्ध लाभार्थी चिन्हित किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक योजना का लाभ पहुंचाना और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर रोक लगाना है। वहीं जिन लोगों का राशन कार्ड बंद हुआ है और वे स्वयं को पात्र मानते हैं, वे प्रखंड आपूर्ति कार्यालय में आवेदन देकर पुनः जांच की मांग कर सकते हैं। यदि जांच में वे पात्र पाए जाते हैं तो उनका राशन कार्ड दोबारा चालू किया जाएगा। अब यह अभियान प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ बिहार की राजनीति में भी चर्चा और बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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