बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :
‘फनिया वध’ ने जगाया राष्ट्रभक्ति का जज्बा, दर्शकों ने सराहा ऐतिहासिक प्रस्तुति
स्वतंत्रता संग्राम की गाथा ने किया रोमांचित, तालियों से गूंजा गांधी सभागार
जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का किया उद्घाटन
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत सार्धशती एवं महाकवि कालिदास जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव-2026 के अंतर्गत 15 जुलाई 2026 को बेतिया के गांधी सभागार, बड़ा रमना में भोजपुरी नाटक ‘फनिया वध’ का भव्य एवं प्रभावशाली मंचन किया गया।

संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली तथा बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के सहयोग से रंग संस्था ‘नया रंग’ द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने चम्पारण के क्रांतिकारी इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को सशक्त रूप से मंच पर प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह, उप विकास आयुक्त काजले वैभव नितिन एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रशासनिक पदाधिकारियों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों, कलाकारों एवं बड़ी संख्या में कला प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

लगभग दो हजार दर्शकों की क्षमता वाला गांधी सभागार पूरी तरह दर्शकों से भरा रहा। प्रस्तुति के दौरान कलाकारों के सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद, जीवंत मंच-सज्जा तथा उत्कृष्ट प्रकाश एवं ध्वनि संयोजन ने दर्शकों को अंत तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा।

पूरे नाटक के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट और दर्शकों की भावनात्मक सहभागिता ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। प्रख्यात साहित्यकार डॉ. दिवाकर राय द्वारा रचित यह भोजपुरी नाटक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण किन्तु अपेक्षाकृत कम चर्चित ऐतिहासिक प्रसंग पर आधारित है।

नाटक में अंग्रेजी शासन के मुखबिर फणीन्द्रनाथ घोष (फनिया) की क्रांतिकारियों द्वारा योजनाबद्ध हत्या की घटना को प्रभावशाली रंग-भाषा, सशक्त अभिनय तथा संवेदनशील मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत किया गया।

प्रस्तुति ने चम्पारण की क्रांतिकारी विरासत, स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को नई पीढ़ी के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक का निर्देशन एवं परिकल्पना राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), नई दिल्ली के स्नातक तथा उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार से सम्मानित रंगनिर्देशक एवं अभिनेता हरिशंकर रवि ने किया।

उनके कुशल निर्देशन, प्रभावी दृश्य संयोजन, अनुशासित मंचीय संरचना एवं संवेदनशील रंग-दृष्टि ने प्रस्तुति को कलात्मक उत्कृष्टता प्रदान की। प्रस्तुति का संगीत एवं ध्वनि संयोजन एम. डी. आसिफ ने किया, जिसने नाटक के भावपक्ष को और अधिक प्रभावशाली बनाया। सहायक निर्देशक कालिका सहित संपूर्ण रंगमंचीय टीम के सामूहिक समर्पण एवं रचनात्मक प्रयासों ने प्रस्तुति को उच्च स्तर प्रदान किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी राकेश कुमार का विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन उल्लेखनीय रहा। इस प्रस्तुति की विशेष उपलब्धि यह रही कि इसका निर्माण मात्र 15 दिवसीय उत्पादनोन्मुख रंगमंच कार्यशाला के माध्यम से किया गया। सीमित अवधि में युवा एवं अनुभवी रंगकर्मियों ने अभिनय, संवाद, मंच संचालन, शारीरिक प्रशिक्षण तथा सामूहिक रंगाभ्यास के माध्यम से उत्कृष्ट प्रस्तुति तैयार की। यह प्रस्तुति सामूहिक अनुशासन, रचनात्मक सोच और टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी। नाटक में नितेश कुमार, अंशुमन कुमार, आशीष कुमार, हर्षिता प्रिया, सुधाकर कुमार, रामपत कुमार चौधरी, प्रतीक कुमार, राहुल, जन्नत, अनुराग, रुस्तम अंसारी, विवेक कुमार, रविश, राशि कुमारी गुप्ता, प्रियंका कुमारी, अंशिका किरण, आर्यन कुमार, पुज्जावल कुमार, रवि राज शुक्ला, राहुल कुमार, हिमांशु कुमार, हिमांशु कुमार ठाकुर, जितजीवन प्रसाद, अंकित कुमार, लक्ष्मी कुमारी, अनामिका तिवारी, हैप्पी राज, श्रेयशी, सीमा जी, उर्वशी कुमारी, अर्पिता रानी, रविराज, प्रशांत कुमार, अमन कुमार, ज्योति शर्मा, आर्यन शर्मा, देवेंद्र, प्रभात कुमार झा, सुनील शर्मा, मनोज तथा गोबिंदराम सहित अनेक कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय कर दर्शकों की भरपूर सराहना अर्जित की। विशेष आभार संजय उपाध्याय के प्रति व्यक्त किया गया, जिन्होंने नाटक में प्रयुक्त प्रसिद्ध ‘फिरंगिया’ गीत के उपयोग हेतु अपनी सहमति प्रदान की। कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली के प्रतिनिधि नीलेश दीपक की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही लेखक डॉ. दिवाकर राय, प्रशांत कुमार, चंदन एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘फनिया वध’ केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि चम्पारण के गौरवशाली क्रांतिकारी इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस, त्याग एवं राष्ट्रप्रेम को समर्पित एक सशक्त सांस्कृतिक दस्तावेज के रूप में सामने आया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन तथा स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया।








