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Post: अगर एसएसपी को राजनीति करनी है तो वर्दी छोड़कर राजनीति में आ जाएं : प्रशांत किशोर का बड़ा हमला

अगर एसएसपी को राजनीति करनी है तो वर्दी छोड़कर राजनीति में आ जाएं : प्रशांत किशोर का बड़ा हमला

रिपोर्ट : विशेष ब्यूरो पटना 

चुनाव में पुलिस पर पक्षपात और अवैध हिरासत का लगाया आरोप

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

पटना, (दिवाकर पाण्डेय)। बांकीपुर उपचुनाव के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ा सियासी हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान पुलिस ने उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया, कई स्थानीय लोगों को बाहरी बताकर हिरासत में लिया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। प्रशांत किशोर ने कहा कि पूरे मामले के सबूत चुनाव आयोग को सौंप दिए गए हैं और जल्द ही दिल्ली जाकर भी इस मामले की शिकायत दर्ज कराई जाएगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी के 50 से अधिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने डिटेन किया। पुलिस का तर्क था कि ये सभी बाहरी लोग हैं और चुनावी गतिविधियों में शामिल थे, जबकि इनमें से कई लोग पटना के ही निवासी निकले। उन्होंने आरोप लगाया कि 18 से ज्यादा स्थानीय लोगों को भी बाहरी बताकर उठाया गया और बाद में बिना किसी स्पष्ट कारण के छोड़ दिया गया। उन्होंने सीधे पटना के एसएसपी कार्तिकेय के. शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका रवैया पूरी तरह अनप्रोफेशनल रहा। प्रशांत किशोर ने कहा, “अगर एसएसपी को राजनीति करनी है तो वर्दी छोड़कर राजनीति में आ जाएं।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव वाले दिन उन्होंने कई बार एसएसपी को फोन किया, लेकिन एक बार भी कॉल रिसीव नहीं किया। जबकि पटना डीएम कुंदन कुमार और चुनाव पर्यवेक्षक ने हर बार फोन उठाकर बातचीत की। प्रेस वार्ता में कई स्थानीय लोगों ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। नवल जी ने आरोप लगाया कि आधी रात को पुलिस उनके घर पहुंची और उन्हें जबरन थाने ले गई। उन्हें मतदान शुरू होने से ठीक पहले तक थाने में बैठाकर रखा गया। वहीं नेहा भूषण नामक महिला ने दावा किया कि वह जन सुराज के लिए काम कर रही थीं, तभी पुलिस उनके घर में घुस गई और उन्हें बाहरी बताकर परेशान किया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उनके समर्थकों को प्रताड़ित किया। उन्होंने कहा कि एसएसपी को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि 54 लोगों को किस आधार पर हिरासत में लिया गया और उनमें भाजपा के कितने कार्यकर्ता शामिल थे।उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के डीजीपी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि 3 अगस्त को होने वाली मतगणना में पटना एसएसपी की कोई भूमिका नहीं होगी। साथ ही उन्होंने कुछ थाना प्रभारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने कानून से बाहर जाकर कार्रवाई की है तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी और कोई वरिष्ठ अधिकारी उसे नहीं बचा पाएगा। अंत में प्रशांत किशोर ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए दावा किया कि बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा इतनी बड़ी हार झेलेगी कि भविष्य में वह यह कहने की स्थिति में नहीं रहेगी कि किसी को भी टिकट देकर चुनाव जिताया जा सकता है। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कानूनी और संवैधानिक लड़ाई अंत तक लड़ती रहेगी।

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