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Post: पीसीसी सड़क निर्माण में गुणवत्ता में कोताही पर होगी कड़ी कार्रवाई : गरिमा

पीसीसी सड़क निर्माण में गुणवत्ता में कोताही पर होगी कड़ी कार्रवाई : गरिमा

रिपोर्ट : उप-संपादक बेतिया

नगर निगम द्वारा राज ड्योढ़ी में 81.10 लाख से बन रही पीसीसी सड़क

बेतिया राज के ऐतिहासिक राज ड्योढ़ी परिसर में बन रही पीसीसी सड़क के निर्माण का महापौर ने किया निरीक्षण

बेतिया राज’ की विरासत से जुड़े राज ड्योढ़ी रोड को महापौर ने बताया नगर का ‘गौरव पथ’, गुणवत्ता में कोताही पर निर्माण एजेंसी को काली सूची की चेतावनी

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख

बेतिया, (मोहन सिंह)। महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र के ऐतिहासिक धरोहर राज ड्योढ़ी परिसर क्षेत्र के सड़कों की सड़कों तस्वीर अब जल्द बदलेगी।

फोटो : मोहन सिंह

नगर निगम के वार्ड-17 में जोड़ा शिवालय मंदिर के पास राज ड्योढ़ी के पूर्वी गेट से भवानी मंडप होते हुए राज कचहरी कार्यालय के सामने तक एवं राज ड्योढ़ी के दक्षिण गेट से ऑटो स्टैंड के समीप पुल तक पीसीसी सड़क निर्माण की स्वीकृत योजना का कार्य प्रारंभ हो गया है। रोड निर्माण का निरीक्षण करते हुए महापौर ने बताया कि नगर निगम के द्वारा ई टेंडरिंग के माध्यम से मेसर्स शक्ति कंस्ट्रक्शन को इसका कार्यादेश निर्गत किया गया है। प्राक्कलित राशि मो. 97,58,064 रुपये के विरुद्ध एकरारनामा राशि 81,10,356 रुपये निर्धारित की गयी है। यह योजना 06वें वित्त आयोग के फंड से 16 प्रतिशत निम्न दर पर दावेदारी स्वीकृत है। उन्होंने संवेदक को कार्यादेश की सभी निर्धारित 17 शर्तों का अक्षरशः पालन करने का सख्त निर्देश दिया।

छाया : अमिट लेख

महापौर ने कहा कि यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि बेतिया राज की विरासत से जुड़ा गौरव पथ है, इसलिए मानक गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। महापौर श्रीमती सिकारिया ने संवेदक को निर्देशित करते हुए बताया कि कार्यादेश के अनुसार निर्माण में ब्लैक स्टोन और सोन सेंड का प्रयोग अनिवार्य होगा, तीन माह में कार्य पूर्ण करना होगा और गुणवत्ता जांच विभागाध्यक्ष, असैनिक विभाग, एमआईटी, मुजफ्फरपुर से कराने के बाद ही भुगतान होगा। मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, खनन विभाग का एम एंड एन फॉर्म में चालान जमा करना और स्थल पर सूचना पट्ट लगाना अनिवार्य किया गया है। कार्य में त्रुटि या विलंब पर 10 प्रतिशत राशि कटौती, 25 गुना रॉयल्टी कटौती और काली सूची में डालने तक का प्रावधान है। साथ ही 36 माह तक त्रुटि सुधार की जिम्मेदारी संवेदक की होगी।

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