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वाल्मीकिनगर में बाघ के हमले से तीसरी मौत, ग्रामीणों का फूटा आक्रोश

रिपोर्ट : न्यूज़ ब्यूरो, इंडो-नेपाल बॉर्डर

किसान विजय हालदार की मौत के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण, घंटों रहा वाल्मीकिनगर-बगहा मुख्य पथ जाम

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख

वाल्मीकिनगर, (संतोष कुमार)। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन प्रमंडल-2 अंतर्गत वाल्मीकिनगर वन क्षेत्र में बाघ के हमले में किसान विजय हालदार की मौत के बाद शनिवार को पूरे इलाके में मातम के साथ ग्रामीणों का आक्रोश भी भड़क उठा।

फाइल फोटो

कुछ ही महीनों के भीतर बाघ के हमले से यह तीसरी मौत होने से ग्रामीणों में भय, चिंता और वन विभाग के प्रति नाराजगी का माहौल देखने को मिला। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने भेड़ीहारी चौक के समीप दक्षिण टोला के पास शव को वाल्मीकिनगर-बगहा मुख्य पथ पर रखकर सड़क जाम कर दिया।

वन विभाग की गाड़ी को पलटते हुए आमजनों ने किया गुस्से का इजहार

देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और बाघ के आतंक से सुरक्षा तथा मृतक परिवार को उचित सहायता देने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र में लगातार बाघ के हमले की घटनाओं से लोगों में दहशत का माहौल है।

खेती-किसानी और रोजमर्रा के काम के लिए घर से बाहर निकलने वाले ग्रामीणों को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। लोगों ने वन विभाग से बाघ के आतंक से निजात दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। घंटों चले विरोध-प्रदर्शन के बाद एसडीएम चांदनी कुमारी मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं वन विभाग की ओर से मृतक के परिजनों को नौकरी तथा नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की पेशकश की गई। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त किया।

विजय हालदार की मौत ने एक बार फिर वाल्मीकिनगर में मानव-वन्यजीव संघर्ष के गंभीर सवाल को सामने ला दिया है। लगातार हो रही घटनाओं से जहां एक ओर वन्यजीव संरक्षण की चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी बड़ा सवाल बनकर उभर रही है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा के ठोस इंतजाम करे, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को अपने प्रियजन को न खोना पड़े।

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