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महावीरी झंडा : आस्था, अनुशासन और भाईचारे के रंग में रंगा वाल्मीकिनगर

रिपोर्ट : न्यूज़ ब्यूरो, इंडो-नेपाल बॉर्डर 

महावीरी झंडा शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा क्षेत्र

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

वाल्मीकिनगर, (संतोष कुमार)। नाग पंचमी के पावन अवसर पर वाल्मीकिनगर के बिसहा स्थित महावीरी अखाड़ा से निकली पारंपरिक महावीरी झंडा शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और उत्साह के रंग में रंग दिया।

फोटो : संतोष कुमार

हाथों में महावीरी ध्वज, जुबां पर जय श्रीराम का उद्घोष और वातावरण में गूंजती हनुमान चालीसा की धुन—शोभायात्रा में आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में युवा, श्रद्धालु और स्थानीय लोग शामिल हुए। महावीरी ध्वज के साथ आगे बढ़ते श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। रास्तेभर लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया और कई स्थानों पर धार्मिक वातावरण में पूजा-अर्चना भी की गई।

इस आयोजन की खास बात यह रही कि धार्मिक उत्साह के साथ अनुशासन और सौहार्द का भी पूरा ध्यान रखा गया। प्रशासन की ओर से जुलूस के मार्ग पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस एवं एसएसबी के जवान तैनात रहे और पूरे जुलूस पर लगातार नजर रखी गई। महावीरी झंडा पर्व को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने पहले ही आयोजन समितियों और स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की थी। शोभायात्रा के दौरान युवाओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। धार्मिक गीतों और जयकारों के बीच श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ते रहे।

छाया : अमिट लेख

स्थानीय लोगों के सहयोग और आयोजन समिति की व्यवस्था के कारण पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। आयोजन से जुड़े लोगों ने कहा कि महावीरी झंडा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे, सेवा और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का माध्यम भी है। पर्व के दौरान जिस तरह विभिन्न वर्गों के लोगों ने मिलकर सहयोग किया, वह क्षेत्र की सामाजिक एकजुटता का सकारात्मक संदेश देता है। शोभायात्रा के सफल समापन के बाद आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवकों तथा सुरक्षा व्यवस्था में लगे पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों और जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया। वाल्मीकिनगर की इस महावीरी झंडा शोभायात्रा ने एक बार फिर संदेश दिया कि आस्था जब अनुशासन और भाईचारे के साथ आगे बढ़ती है, तो पूरा समाज उसकी सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ जाता है।

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