रिपोर्ट : डेस्क विशेष ब्यूरो, पटना
सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बताया कि सभी बच्चे फिलहाल खतरे से बाहर हैं
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
पटना, (विशेष ब्यूरो)। नालंदा जिला के नूरसराय थाना क्षेत्र अंतर्गत मध्य विद्यालय परासी में मंगलवार को मध्याह्न भोजन (MDM) खाने के बाद दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। भोजन करने के कुछ ही देर बाद बच्चों ने उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की, जिससे विद्यालय परिसर में अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में सभी बीमार बच्चों को इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी देखरेख कर रही है। सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और बताया कि सभी बच्चे फिलहाल खतरे से बाहर हैं। विद्यालय के प्राचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्याह्न भोजन एक एनजीओ के माध्यम से आता है, जिसमें मंगलवार को सोयाबीन-चावल परोसा गया था। भोजन के दौरान जब बच्चों ने नमक कम होने की बात कही, तो रसोइया ने रसोईघर में रखे डिब्बों में से गलती से नमक की जगह सर्फ निकाल कर खाने में मिला दिया और बच्चों को परोस दिया। इसके बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। घटना की जानकारी मिलते ही बच्चों के परिजन सदर अस्पताल पहुंचे। वहां इमरजेंसी वार्ड में एक ही बेड पर दो से तीन बच्चियों को लिटाकर इलाज करते देख परिजन भड़क गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ हंगामा करने लगे। परिजनों का आरोप था कि आपात स्थिति के बावजूद अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी। हालांकि, सिविल सर्जन द्वारा बेहतर इलाज का भरोसा दिए जाने के बाद परिजन शांत हुए। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाओं की भी पोल खोल दी है। घटना की पूर्व सूचना दिए जाने के बावजूद नूरसराय से कोई एंबुलेंस या मेडिकल टीम स्कूल नहीं पहुंची। लाचार होकर परिजनों को अपने बीमार बच्चों को टोटो और टेंपो में लादकर सदर अस्पताल पहुंचाना पड़ा, जिससे स्वास्थ्य महकमे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।








