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चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लिखा पत्र

रिपोर्ट : डेस्क, विशेष ब्यूरो पटना

UGC समेत 6 मांगों पर की पुनर्विचार की अपील

चिराग ने सुझाया है, नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मेधावी अभ्यर्थियों, लंबे समय से अतिथि शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे शिक्षकों और बिहार के छात्रों के हितों का संतुलित एवं न्यायसंगत ध्यान रखा जाए

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख
पटना, (विशेष ब्यूरो)। बिहार में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। 17 अगस्त 2026 को लिखे पत्र में उन्होंने सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 के विभिन्न प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। चिराग पासवान ने कहा कि इस नियमावली का सीधा प्रभाव बिहार के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, अभ्यर्थियों, अतिथि शिक्षकों और विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा। चिराग पासवान ने पत्र में कहा कि बिहार में लंबे अंतराल के बाद सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति का अवसर आया है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मेधावी अभ्यर्थियों, लंबे समय से अतिथि शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे शिक्षकों और बिहार के छात्रों के हितों का संतुलित एवं न्यायसंगत ध्यान रखा जाए। चिराग पासवान ने प्रस्तावित नियमावली में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पुनर्विचार का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि सहायक प्राध्यापक भर्ती में UGC Regulation 2018 के Table 3A को लागू किया जाए। इसके अलावा उन्होंने सहायक प्राध्यापक पद के अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष किए जाने की मांग की है। उन्होंने बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक भर्ती को स्थायी और नियमित किए जाने तथा भर्ती प्रक्रिया में डोमिसाइल नीति लागू करने की भी मांग रखी है। चिराग पासवान ने बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने पर भी जोर दिया है। साथ ही उन्होंने नियमित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति से पहले बिहार के विश्वविद्यालयों में वर्षों से कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों के अनुभव और भविष्य को ध्यान में रखते हुए सेवा-समायोजन/उचित अवसर प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पहल की मांग की है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 को अंतिम रूप देने से पहले छात्रों, अभ्यर्थियों, अतिथि शिक्षकों, विश्वविद्यालयों और विषय विशेषज्ञों समेत सभी संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। उन्होंने UGC के प्रासंगिक मानकों के अनुरूप नियमों की समीक्षा करने की भी अपील की है, ताकि नियमावली लागू होने के बाद बिहार की शैक्षणिक और शोध गतिविधियां प्रभावित न हों। चिराग पासवान ने पत्र में लंबे समय से अतिथि शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे योग्य शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे इन शिक्षकों के अनुभव का उपयोग बिहार के नव निर्मित महाविद्यालयों में भी प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने सरकार से सेवा-समायोजन या उचित अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया, ताकि अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं का बेहतर उपयोग हो सके। चिराग पासवान ने पत्र में उम्मीद जताई कि बिहार सरकार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए ऐसा निर्णय करेगी, जिससे राज्य के छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो, योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो और बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बने। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित सभी पक्षों से व्यापक चर्चा करने और नियमों की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

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