रिपोर्ट : विशेष ब्यूरो, पटना डेस्क
वायरल वीडियो में दरोगा जैसा दिख रहा एक व्यक्ति किसी व्यक्ति से रुपये लेते और फिर उसे गिनते हुए नजर आ रहा है
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
पटना, (विशेष ब्यूरो)। पश्चिम चंपारण के बलथर थाना क्षेत्र में एक दरोगा का कथित तौर पर रुपये लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो में दरोगा जैसा दिख रहा एक व्यक्ति किसी व्यक्ति से रुपये लेते और फिर उसे गिनते हुए नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद करीब 15 हजार रुपये के कथित लेन-देन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान भी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं की गई है। ऐसे में वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि और उसमें शामिल व्यक्ति को लेकर पुलिस की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रुपये के कथित लेन-देन का यह मामला बलथर थाना में दर्ज कांड संख्या 92/26 से जुड़ा बताया जा रहा है। इसी मामले को लेकर करीब 15 हजार रुपये के लेन-देन की चर्चा सामने आई है। बताया जा रहा है कि पूरा मामला न्यायालय से जारी इश्तेहार चिपकाने और वारंटी से संबंधित कार्रवाई से जुड़ा हुआ था. इसी कार्रवाई के दौरान रुपये के कथित लेन-देन को लेकर वीडियो बनाए जाने और उसके सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। वीडियो में रुपये लेते और गिनते हुए दिखाई दे रहे व्यक्ति को लेकर दावा किया जा रहा है कि वह बलथर थाना में तैनात दरोगा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। वायरल वीडियो में कितनी रकम का लेन-देन हुआ और रुपये किस वजह से दिए या लिए गए, इसे लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. मामले से जुड़े लोगों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही इसकी वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। वहीं, इस मामले को लेकर पीड़ित मालती देवी ने बेतिया एसपी को आवेदन देकर एसआई शमशाद अहमद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. आवेदन में उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और संबंधित पुलिस अधिकारी की भूमिका की पड़ताल करने की मांग की है। मामले में अब पुलिस की जांच पर नजर है। वायरल वीडियो की सत्यता, उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान और कथित 15 हजार रुपये के लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे मामले में वास्तव में क्या हुआ था।


