रिपोर्ट : छपरा डेस्क
हिंदी को जन-जन के व्यवहार में उतारने और भारतीय भाषाओं के साथ मिलकर आगे बढ़ाने पर दिया गया जोर
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
छपरा, (सारण)। हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को जयप्रकाश विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने की। कार्यक्रम में हिंदी भाषा के महत्व, उसकी वर्तमान प्रासंगिकता, साहित्यिक समृद्धि तथा वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव पर वक्ताओं ने विस्तार से विचार रखे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. डॉ. परमेंद्र कुमार बाजपेयी ने कहा कि हिंदी केवल भारत की भाषा नहीं, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंच बनाने वाली सशक्त भाषा है। मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देशों में भी भारतीयों के माध्यम से हिंदी पहुंची है।

उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल बोलने तक सीमित न रखते हुए इसे अपने दैनिक जीवन के व्यवहार में अधिक से अधिक प्रयोग करने की आवश्यकता है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर अधिक से अधिक परिपत्र एवं सूचनाएं हिंदी माध्यम में जारी होनी चाहिए। उन्होंने हिंदी में हस्ताक्षर करने तथा हिंदी को अपनी बोलियों और उपभाषाओं के साथ-साथ तमिल, बांग्ला और उड़िया जैसी भारतीय भाषाओं के साथ मिलकर आगे बढ़ाने पर भी बल दिया। कार्यक्रम में प्रो. अजय कुमार ने संपर्क भाषा के रूप में हिंदी के निरंतर विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी आज वैश्विक भाषा के रूप में उभर रही है। उन्होंने हिंदी के वर्तमान स्वरूप को विज्ञान एवं वाणिज्य से जोड़कर देखने की आवश्यकता बताई। दर्शनशास्त्र विभाग के आचार्य डॉ. हरिश्रंद्र ने कहा कि हिंदी में गहन दार्शनिक विचार-विमर्श की व्यापक संभावनाएं हैं। हिंदी विभाग के डॉ. चंदन कुमार श्रीवास्तव ने हिंदी को राष्ट्रीयता के संदर्भ में देखने और उसकी भूमिका को समझने की बात कही। डॉ. रजनीश कुमार यादव ने हिंदी साहित्य की समृद्धि तथा लोकप्रिय मीडिया में हिंदी की मजबूत स्थिति का उल्लेख करते हुए भाषा के विकास के प्रति गहरी आस्था जताई। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत व्यवस्थापक प्रमुख डॉ. सूर्यदेव राम ने शिक्षक और संस्कृति के संदर्भ में हिंदी के महत्व को रेखांकित किया। इतिहास विभाग के आचार्य डॉ. राजेश कुमार नायक ने अपने संबोधन में हिंदी के उभरते स्वरूप और समाज विज्ञान के संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता को महत्वपूर्ण बताया। वहीं अन्य वक्ताओं ने भी हिंदी के प्रचार-प्रसार, उसके व्यावहारिक उपयोग और नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। समारोह में हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अजित नारायण सहित बालकिशोर, सौरभ तिवारी, मीर जमाल अहमद, विवेकी कुमार, अनुज राज, विनोद यादव, मृत्युंजय राय, अंजली, किरण कुमारी एवं चंद्रगुप्त कुशवाहा समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। तीज व्रत के बावजूद विद्यार्थियों की संतोषजनक उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष रूप से सफल बनाया।


