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Post: ऐसे चार आईपीएस अधिकारी जिनके धमक से ज़िले के दस्युओं का काला साम्राज्य समाप्त हुआ

ऐसे चार आईपीएस अधिकारी जिनके धमक से ज़िले के दस्युओं का काला साम्राज्य समाप्त हुआ

बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :

बेतिया एसपी बच्चू सिंह मीणा का कार्यकाल अपराधियों के लिए काल एवं पुलिस तथा आम जनता के लिए स्वर्णिम काल साबित हुआ

न्यूज़ डेस्क, जिला पश्चिम चंपारण 

मोहन सिंह

–  अमिट लेख

पश्चिम चंपारण, (ए.एल.न्यूज़)। पश्चिम चंपारण जिला में जब चीनी मिलों एवं सामंतवादियों का अत्याचार तथा आतंक चरम सीमा पर पहुंच गया और इनके द्वारा पाले गए लठैतो द्वारा गरीब किसानों को सताया जाने लगा।

फ़ाइल फोटो : श्री विष्णु दयाल राम 

उस समय कांग्रेस का शासन हुआ करता था और कांग्रेस के शासनकाल में ही पीड़ित लोग संगठित होकर इस अत्याचार से छुटकारा पाने के लिए उनका मुकाबला करने के लिए हथियार उठा लिए।

फ़ाइल फोटो : श्री यशवंत मल्होत्रा 

उसी समय पश्चिम चंपारण में मिनी चंबल की नींव पड़ गई और फिर शुरू हुआ फिरौती के लिए अपहरण का खेल। उस समय बेतिया से लेकर बाल्मीकिनगर तक एक ही पुलिस जिला बेतिया हुआ करता था।

फ़ाइल फोटो : श्री अशोक कुमार गुप्ता 

उसके बाद पश्चिम चंपारण हत्या एवं अपहरण की आंधी से सिहर उठा और दिनदहाड़े हत्या तथा अपहरण की घटनाएं होने लगी। शाम 4:00 बजते लोग अपने-अपने घरों में दुबक जाने को मजबूर हो गए।

फ़ाइल फोटो : श्री बच्चू सिंह मीणा

इस दौरान जिले के तत्कालीन विद्वान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी एन सिंह ने एक मुकदमे के सुनवाई के दौरान अपने फैसले में पश्चिम चंपारण को मिनी चंबल घोषित कर दिया। इस फैसले से राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक हड़कंप मच गया। फिर राज्य सरकार ने इस दौरान पश्चिम चंपारण के द्वितीय पुलिस अधीक्षक बीडी राम, उनके बाद यशवंत मल्होत्रा एवं अशोक कुमार गुप्ता को बढ़ते हुए अपराध पर काबू पाने के लिए जिले की कमान सौंपा । इन लोगों ने अपने-अपने कार्यकाल में दर्जनों दस्यु सरगनाओं को मुठभेड़ में मार कर जिले वासियों को राहत की सांस दी। इनका नाम सुनते ही कई दस्यु सरदार अपना अपना इलाका छोड़ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में भाग खड़े हुए। उनके पूर्व सबसे पहले पुलिस अधीक्षक एस एस पी यादव के समक्ष सबसे पहली बार योगापट्टी क्षेत्र का दस्यु सरगना सतन यादव ने आत्म समर्पण किया था। इस दौरान एसपी बीडी राम, यशवंत मल्होत्रा एवं अशोक कुमार गुप्ता मिनी चंबल के हीरो साबित हुए। पहली बार जिले के वरिष्ठ पत्रकार बगहा निवासी स्वर्गीय तीर्थराज कुशवाहा का अपहरण कर लिया गया था। जिससे भारी मशक्कत और 10 दिनों के परिश्रम के बाद पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार गुप्ता ने सकुशल मुक्त कराया था। उसके बाद जिले को अपराध मुक्त कराने और दस्यु गिरोह से मुक्त कराने हेतु कांग्रेस की बिंदेश्वरी दुबे सरकार द्वारा ऑपरेशन ब्लैक पैंथर चलाया गया, जिसमें एसपी अशोक कुमार गुप्ता की अहम भूमिका को देखते हुए सरकार द्वारा एक समारोह के दौरान उपहार स्वरूप मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे ने उन्हें पिस्टल देकर सम्मानित किया था, जो एक ऐतिहासिक क्षण था। फिर प्रदेश में राजद के शासनकाल में फिर से एक बार जिला अपराध की आग में जलने लगा और उस काल को जंगल राज की संज्ञा दी गई तथा पुलिसतंत्र बौना साबित होने लगी। दिनदहाड़े 1995 में एक दस्यु गिरोह द्वारा रामनगर थाने को आग के हवाले कर दिया गया । उसी समय सरकार द्वारा पश्चिम चंपारण जिला में बगहा पुलिस जिला का गठन किया गया और जिले में बेतिया एवं बगहा पुलिस जिला स्थापित हुआ। लेकिन एनडीए सरकार के आते ही स्थिति बदली और सरकार बदली तथा जिले वासियों ने चैन की सांस ली। फिर बेतिया एसपी बच्चू सिंह मीणा का कार्यकाल अपराधियों के लिए काल एवं पुलिस तथा आम जनता के लिए स्वर्णिम काल साबित हुआ।श्री मीणा के नाम और धमक से अपराधी थर थर कांपते थे। उन्होंने बेतिया पुलिस जिला में एक सफल पुलिस अधीक्षक के रूप में ख्याति प्राप्त की।

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