बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :
करोड़ों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने वाला चुनाव आयोग “मतदाता अधिकार दिवस” महज़ ढकोसला–संविधान से खुला खिलवाड़ : भाकपा माले
चुनाव आयोग वोट चोरी लूट कर भाजपा को जिताने का जश्न मना रहा है : वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता
भाकपा (माले) ने लोकतंत्र व मताधिकार की रक्षा की लड़ाई तेज़ करने का किया आह्वान
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। 7 करोड़ों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने वाला चुनाव आयोग “मतदाता अधिकार दिवस” मना रहा है यह महज़ ढकोसला है–संविधान से खुला खिलवाड़ है। उक्त बातें भाकपा माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहीं।

आगे कहा कि बिहार में 69 लाख सहित 12 राज्यों में चल रहे एस आई आर के जरिये 7 करोड़ लोगों का मतदाता अधिकार छिनने वाला चुनाव आयोग मतदाता अधिकार दिवस मनाकर अपने हाथ अपना पिठ थपथपा रहा है। हमारी पार्टी इस तरह के असैवधानिक कार्यवाही का बहिष्कार करतीं है हमारी पार्टी अलग से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा दिवस के रूप में मना रहीं हैं।

आगे लोकतंत्र व मताधिकार की रक्षा की लड़ाई तेज़ करने का किया आह्वान। भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य सुनील कुमार राव ने कहा की भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर अभूतपूर्व हमला किया जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर देशभर में करोड़ों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में गरीब, प्रवासी मज़दूर, महिलाएँ, दलित-आदिवासी और अल्पसंख्यक शामिल हैं।

वरिष्ट अधिवक्ता सुशील शशंक ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव आयोग द्वारा “मतदाता अधिकार दिवस” मनाना पूरी तरह से पाखंड और ढकोसला है। एक ओर वोट देने के अधिकार को छीना जा रहा है और दूसरी ओर उसी अधिकार का उत्सव मनाया जा रहा है — यह संविधान की आत्मा के साथ खुला मज़ाक है। समाजसेवी पंकज जी ने कहा कि वोट देने का अधिकार कोई एहसान नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है। SIR जैसी प्रक्रियाएँ लोकतांत्रिक भागीदारी को सीमित करने का औज़ार बनती जा रही हैं। इमारत ए सरिया जिला सचिव जाकिर वलिग ने कहा कि बिहार सहित कई राज्यों में अभी तक 7 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम बिना पर्याप्त पारदर्शिता के हटाए गए हैं। यह स्थिति सीधे-सीधे अनुच्छेद 326 और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है। इनके अलावा काजी शम्सूल हक, प्रोफेसर सम्सूल हक, आलमगीर सहब, संजय यादव, जितेन्द्र राम, मोतिउर्र रहमान, विनोद यादव, सुरेन्द्र चौधरी, धर्मनाथ कुशवाहा, पोखराज कुशवाहा, बालेश्वर पाण्डेय, नन्दकिशोर ठाकुर, योगेन्द्र यादव सोना देवी, दिलीप श्रीवास्तव आदि लोगों ने भी सम्बोधित किया।
अध्यक्षता डाक्टर मोजिउर्र रहमान ने किया।








