पटना से हमारे विशेष संवाददाता की रिपोर्ट :
वाल्मीकिनगर और रक्सौल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को मंजूरी, सरकार ने खोल दी तिजोरी
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
पटना, (दिवाकर पाण्डेय)। बिहार सरकार ने पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर में हवाई अड्डे के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। सिविल एविएशन विभाग जल्द ही निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इस हवाई अड्डे के बनने से क्षेत्र के लोगों को अब हवाई यात्रा के लिए पटना, दरभंगा या गोरखपुर जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे के लिए भूमि चिह्नांकन का कार्य भी युद्ध स्तर पर पूरा कर लिया गया है। प्रस्तावित हवाई अड्डा कुल 303 एकड़ भूमि पर विकसित होगा। इसमें से 73 एकड़ भूमि पहले से उपलब्ध है, जबकि शेष 229 एकड़ भूमि के हस्तांतरण और अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अपर समाहर्ता स्तर से तकनीकी औपचारिकताएं पूरी होते ही निर्माण कार्य धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा। वाल्मीकिनगर के साथ-साथ सीमावर्ती शहर रक्सौल को भी अंतरराष्ट्रीय हवाई मानचित्र पर स्थापित करने की तैयारी है। रक्सौल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण पर करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे ने पुष्टि की है कि दोनों हवाई अड्डों के लिए निविदा प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाएगी। रक्सौल एयरपोर्ट सामरिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से भी पूरे उत्तर बिहार के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (VTR) की वैश्विक लोकप्रियता को देखते हुए यह हवाई अड्डा पर्यटन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को वीटीआर पहुँचने में काफी समय लगता है, लेकिन हवाई सुविधा शुरू होने से वे कम समय में यहाँ पहुँच सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन और सेवा क्षेत्र को नई गति मिलेगी, जिससे चंपारण की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय युवाओं को रोजगार के रूप में मिलेगा। हवाई अड्डों के संचालन से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हजारों नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। चंपारण के दोनों जिलों (पूर्वी और पश्चिमी) के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल से सटे इलाकों के लिए भी यह कनेक्टिविटी वरदान साबित होगी, जिससे पूरे उत्तर बिहार के विकास को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।








