बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :
केंद्र सरकार द्वारा 2026-27 के लिए गन्ना मूल्य में प्रति क्विंटल मात्र 10 रुपया की बढ़ोतरी घोषित करना गन्ना किसानों के साथ धोखाधड़ी और विश्वासघात : सुनील कुमार राव
गन्ना किसानों के नाम इंसाफी के खिलाफ होगा आंदोलन: किसान महासभा
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव, जिला सचिव इंद्र देव कुशवाहा और बिहार गन्ना उत्पादक किसान महासभा के जिला अध्यक्ष संजय यादव ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में नए पेराई सत्र के लिए मात्र 10 रुपए बढ़ाएं जाने को नाकाफ़ी बताते हुए इसे गन्ना किसानों के साथ धोखाधड़ी और विश्वासघात कहा है। किसान नेताओं ने कहा कि गत बर्ष की तुलना में मात्र दस रुपया प्रति क्विंटल कीमत बढ़ाने को ही केंद्र सरकार ने 5 मई 2026 को 2026-27 सीज़न के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) घोषित कर दिया है। किसान नेताओं ने साफ कहा है कि घोषित FRP: ₹365 प्रति क्विंटल (10.25% रिकवरी दर पर), पिछले सीज़न (2025-26) के मुकाबले इसमें ₹10 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।इस मुल्य की बढ़ोतरी से बिहार में गन्ना मूल्य 400 रुपए प्रति किवंटल मात्र होगा। जबकि वर्तमान पेराई सत्र में यह मुल्य 390 रुपए प्रति किवंटल है। नए गन्ना पेराई सत्र में मात्र 10 रुपए गन्ना मूल्य में यह बढ़ोत्तरी किसानों के साथ गद्दारी और चीनी मिल मालिकों के प्रति मोदी सरकार की वफादारी दिखाई देता है। किसान इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। यहां उल्लेखनीय है कि बगल के प्रदेश उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य 425 रुपए प्रति किवंटल है।10 रुपए बढ़ने से वहां 435 रूपए प्रति किवंटल हो जाएगा। बिहार में उत्तर प्रदेश से मात्र 10 रुपए प्रति किवंटल कम गन्ना मूल्य रहता था। लेकिन उसके बराबर भी बिहार के किसानों को नहीं दिया जा रहा है।यह सरासर नाइंसाफी है।गन्ना किसानों की लंबे समय से मांग रही है कि गन्ना मूल्य 600 रुपए प्रति किवंटल सरकार घोषित करें। लेकिन कॉरपोरेट परस्ती में मशगूल मोदी सरकार ने किसानों की एक भी नहीं सुना। किसानो के सामने अपनी गन्ना मूल्य 600 रुपए प्रति किवंटल करने के लिए संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है। इसको लेकर बिहार के गन्ना किसान अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत में किसान महासभा की स्थापना दिवस 10 मई को जो हिंदुस्तान की आजादी का प्रथम महासंग्राम 1857 का प्रथम दिवस भी है के दिन जिला मुख्यालय शहरों में मार्च निकाल कर केंद्र सरकार का विरोध करेंगे।








