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Post: जीएमसीएच मामले में एक पखवाड़ा बाद भी नहीं मिल सका पत्रकारों को न्याय

जीएमसीएच मामले में एक पखवाड़ा बाद भी नहीं मिल सका पत्रकारों को न्याय

बेतिया से उप-संपादक का चश्मा : 

थानाध्यक्ष दो दिनों तक घटना की प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज करने से आना कानी करते रहे और डॉक्टरों की ओर से आवेदन का इंतजार करते रहे. ताकि काउंटर केस किया जा सके

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

बेतिया, (मोहन सिंह)। जीएमसीएच बेतिया में 17 जून 26 को समाचार संकलन करने गए पत्रकारों पर अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों एवं कर्मियों द्वारा हमला कर की गई पिटाई और बंधक बनाने के बाद छीनी गई मोबाइल, पैसा तथा समान के मामले में घटना के एक पखवारे बाद भी जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया जाना एक गंभीर चिंता का विषय है। इससे पत्रकारों एवं आम नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हैरत की बात तो यह है कि घटना के बाद अस्पताल के डेप्युटी सुपरीटेंडेंट डॉक्टर डीएन मिश्रा तथा डॉ राजेश कुमार उपस्थित रहे और हमलावरों को प्रोत्साहित करते रहे। आश्चर्य की बात तो यह है कि घटना के दौरान घटना स्थल पर नगर पुलिस पुलिस बल के साथ तमाशा बिन बनी रही। उसी रात पीड़ित पत्रकारों में नगर थाना अध्यक्ष को लिखित आवेदन देकर FiR दर्ज करने की मांग किया। थानाध्यक्ष दो दिनों तक घटना की प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज करने से आना कानी करते रहे और डॉक्टरों की ओर से आवेदन का इंतजार करते रहे. ताकि काउंटर केस किया जा सके। इस मामले में जो पत्रकारों द्वारा दबाव बनाया गया तो थाना अध्यक्ष ने पहले वाली आवेदन को लौटा दिया और 19 जून 26 को रात में एक दूसरा आवेदन लिखवा कर प्राथमिक दर्ज किया गया। लिखित आवेदन के अनुसार उसमें धारा वही लगाई गई। इसके बाद फिर पत्रकारों में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से मिलकर इस मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए एक आवेदन देकर मांग किया कि इस पूरे प्रकरण में घटना स्तर पर उपस्थित सीनियर डॉक्टर एवं नगर थाना अध्यक्ष कि इस मामले में संलिप्तता ओम भूमिका की जांच कर उचित कार्रवाई किया जाए। संबंध में जिलाधिकारी ने एक जांच टीम गठित कर जांच रिपोर्ट मांगा है। इस दौरान यहां के स्थानीय सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि इस मामले में पूरी तरह संवेदनहीन बने रहे।

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