विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, पटना :
3 मासूम बच्चियों की तस्करी पर ऐतिहासिक फैसला, बगहा कोर्ट ने मां-बेटे को सुनाई उम्रकैद,1-1 लाख जुर्माना भी लगाया
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
पटना/बेतिया, (दिवाकर पाण्डेय)। बगहा व्यवहार न्यायालय ने मानव तस्करी के खिलाफ एक ऐतिहासिक और कड़ा संदेश दिया है। तीन मासूम बच्चियों की तस्करी के मामले में पश्चिम बंगाल के मां-बेटे को सश्रम आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मानव तस्करी केवल अपराध नहीं, बल्कि संविधान और मानवता दोनों पर सीधा हमला है। बगहा के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्रा की अदालत ने मानव तस्करी के मामले में पश्चिम बंगाल के आसनसोल निवासी नियोती देवी और नागेश भुइयां को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 143(5) के तहत दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। मामला नौरंगिया थाना कांड संख्या-05/2026 का है। अभियोजन के अनुसार, दोनों आरोपी जनजातीय क्षेत्र की सात, आठ और 11 वर्ष की तीन नाबालिग बच्चियों को झाड़-फूंक और बेहतर भविष्य का झांसा देकर पश्चिम बंगाल के आसनसोल ले जा रहे थे। मानव व्यापार निरोध इकाई और नौरंगिया थाना पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर तीनों बच्चियों को सुरक्षित मुक्त कराया और दोनों आरोपियों को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से बगहा से आसनसोल का रेल टिकट भी बरामद हुआ था। सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों, अनुसंधानकर्ता, गवाहों, जब्ती सूची, रेल टिकट, उम्र सत्यापन रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों ने पूरे षड्यंत्र की पुष्टि कर दी। अदालत ने माना कि तीनों बच्चियां नाबालिग थीं और आरोपियों का उनसे कोई पारिवारिक संबंध नहीं था। अपने फैसले में अदालत ने कहा कि मानव तस्करी अनुच्छेद-21 में दिए गए गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार और अनुच्छेद-23 में मानव तस्करी निषेध के संवैधानिक प्रावधानों पर सीधा हमला है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी समाज के हित में नहीं हो सकती।








