संकलन : उप-संपादक बेतिया
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बाघ लंबे समय से बीमार और कमजोर था तथा भोजन की तलाश में इस इलाके में पहुंच गया था
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। पश्चिमी चंपारण जिला अंतर्गत भारत-नेपाल सीमा से सटे वाल्मीकिनगर के बिसहा स्थित हाथी मलखंता जंगल क्षेत्र में गुरुवार शाम एक वृद्ध नर बाघ का शव मिला। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बाघ लंबे समय से बीमार और कमजोर था तथा भोजन की तलाश में इस इलाके में पहुंच गया था। अधिकारियों का मानना है कि इसी बाघ ने गुरुवार दोपहर बकरी चरा रहे एक बुजुर्ग पर हमला किया था और उसके बाद जंगल की ओर लौट गया। घटना के बाद वन विभाग की पेट्रोलिंग टीम ने करीब दो घंटे तक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान हमले वाली जगह से लगभग 500 मीटर दूर जंगल के भीतर बाघ का शव बरामद किया गया। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि बाघ काफी समय से कमजोर और बीमार था। इसी वजह से वह ऐसे इलाके में पहुंच गया, जहां सामान्यतः बाघों की मौजूदगी दर्ज नहीं की जाती। आसान शिकार की तलाश में उसने बुजुर्ग पर हमला किया, लेकिन अधिक दूर तक नहीं जा सका। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक सह निदेशक गौरव ओझा ने कहा, “प्रथम दृष्टया देखने से यह प्रतीत होता है कि मृत बाघ का पूर्व में किसी अन्य टाइगर से संघर्ष हुआ होगा। क्योंकि उसके पेट, पंजे और पूंछ के पास इंजरी मार्क थे। पोस्टमार्टम के समय उसके जख्म वाले स्थानों पर कीड़े लगे मिले। बीमार और कमजोर होने के कारण यह बाघ ऐसे इलाके में पहुंच गया था, जहां अमूमन बाघ स्पॉट नहीं किए जाते हैं। आसान भोजन की तलाश में उसने बकरी चरा रहे एक बुजुर्ग पर हमला किया और वापस जंगल में चला गया। जब वनकर्मियों की टीम उसकी तलाश में जंगल के भीतर गई तो हमले वाली जगह से करीब 500 मीटर दूर उसका शव मिला। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई।” उन्होंने बताया कि बाघ का बिसरा भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून भेजा जाएगा, ताकि उसकी मौत के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक तरीके से पता लगाया जा सके। वन विभाग को उम्मीद है कि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो जाएगा कि बाघ की मौत बीमारी, पुराने जख्मों या किसी अन्य कारण से हुई।








