सिवान में खून की कमी पर कसेगी लगाम :
• बच्चों-किशोरियों और गर्भवती महिलाओं पर खास फोकस
• स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया एनीमिया नियंत्रण का प्रशिक्षण
• बच्चों से गर्भवती महिलाओं तक चलेगी जांच-इलाज की मुहिम
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
सिवान, (के.के.सिंह सेंगर)। एनीमिया यानी खून की कमी को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब जांच, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। जिले में एनीमिया के मामलों को कम करने और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को एनीमिया मॉड्यूल पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

पिरामल स्वास्थ्य के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों को एनीमिया की पहचान से लेकर उपचार और मरीजों के नियमित फॉलोअप तक की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को एनीमिया के प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी देकर प्रखंड और समुदाय स्तर पर इसकी पहचान एवं उपचार व्यवस्था को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में पिरामल स्वास्थ्य के राजेश तिवारी, पिरामल स्वास्थ्य के जिला प्रबंधक बलिंद्र सिंह गांधी फेलो सहित अन्य पदाधिकारी एवं स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
हीमोग्लोबिन जांच से होगी एनीमिया की पहचान
प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को बताया गया कि एनीमिया की पहचान के लिए हीमोग्लोबिन की जांच महत्वपूर्ण है। जांच के बाद एनीमिया की स्थिति के अनुसार उसका वर्गीकरण और उपचार किया जाता है। स्वास्थ्यकर्मियों को मरीज की स्थिति के अनुरूप उपचार प्रक्रिया, दवाओं के उपयोग और नियमित फॉलोअप के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों में एनीमिया की समय पर पहचान और आवश्यक उपचार पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि इन समूहों में खून की कमी का समय रहते पता लगाना और उसका उपचार करना बेहद जरूरी है।
आयरन-फोलिक एसिड के नियमित सेवन पर जोर
प्रशिक्षण में स्वास्थ्यकर्मियों को आयरन-फोलिक एसिड के नियमित सेवन के साथ संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि एनीमिया की रोकथाम के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि भोजन में आयरन, फोलिक एसिड और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा भी जरूरी है। स्वास्थ्यकर्मियों से कहा गया कि वे समुदाय में लोगों को एनीमिया के कारण, बचाव के उपाय और उपचार के प्रति जागरूक करें तथा लाभार्थियों को निर्धारित आयरन-फोलिक एसिड की खुराक नियमित रूप से लेने के लिए प्रेरित करें। गंभीर एनीमिया में विशेष उपचार की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान आयरन सुक्रोज और फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) के उपयोग तथा पात्रता से संबंधित जानकारी भी साझा की गई। स्वास्थ्यकर्मियों को बताया गया कि मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर इन उपचार विकल्पों का उपयोग किया जाता है। सिविल सर्जन ने कहा कि एनीमिया की प्रभावी रोकथाम के लिए जांच, उपचार और नियमित फॉलोअप को स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। मरीजों की पहचान के बाद यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे उपचार पूरा करें और आवश्यकता के अनुसार दोबारा जांच कराएं। एएनएम-जीएनएम और सीएचओ को भी मिलेगा प्रशिक्षण जिला स्तर पर प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से आगे एएनएम, जीएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारीको भी एनीमिया प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे एनीमिया की जांच, पहचान और उपचार की सेवाओं को प्रखंड से लेकर गांव और समुदाय स्तर तक और मजबूत करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले संभावित एनीमिया मरीजों की समय पर पहचान हो और उन्हें जरूरत के अनुसार उपचार एवं फॉलोअप की सुविधा मिले।
सिवान में बच्चों और महिलाओं में एनीमिया बड़ी चुनौती
NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार सिवान में 6 से 59 माह के 63.9 प्रतिशत बच्चे, 15 से 19 वर्ष की 64 प्रतिशत महिलाएं और 15 से 49 वर्ष की 53.1 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित पाई गई थीं। आंकड़े बताते हैं कि जिले में विशेषकर बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के बीच एनीमिया नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच और उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सिवान को एनीमिया मुक्त बनाने’ का आह्वान
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से समन्वित प्रयास करते हुए ‘सिवान को एनीमिया मुक्त बनाने’ की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि केवल अस्पताल स्तर पर उपचार से एनीमिया का बोझ कम नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों, समुदाय और परिवारों की भागीदारी भी जरूरी है।
क्या है एनीमिया और क्यों होती है खून की कमी?
हमारे रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है। यह रक्त को लाल रंग देता है और शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। जब शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है, तो इस स्थिति को एनीमिया या खून की कमी कहा जाता है। शरीर के लिए ऑक्सीजन बेहद जरूरी है। हम जो भोजन खाते हैं, उससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और इस ऊर्जा के उत्पादन की प्रक्रिया में ऑक्सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को फेफड़ों से शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाता है। इसलिए हीमोग्लोबिन की कमी होने पर शरीर के ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और थकान, कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना तथा काम करने की क्षमता में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।








