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Post: खेत मजदूरों का आज 13 अगस्त से दो दिनी अनशन सत्याग्रह शुरू

खेत मजदूरों का आज 13 अगस्त से दो दिनी अनशन सत्याग्रह शुरू

रिपोर्ट : उप-संपादक, बेतिया

बासगीत जमीन का पर्चा और 5 डिसमिल जमीन की मांग पर अड़े खेतिहर मजदूर

गरीबों को उनके बसे हुए जमीन का पीपीएफ एक्ट 1947 के तहत बासगीत का पर्चा दो , सभी भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन दो: सुनील कुमार राव

राशन सूची में गरीबों के नाम की कटौती बंद करो , गांव के मजदूर – किसानों से टैक्स वसूलना बंद करो: नवीन कुमार

मुखिया नवीन कुमार, मंगल चौधरी, अशोक कुशवाहा, हारून गद्दीमोजम्मिल हुसैन, धर्मेन्द्र कुशवाहा, मुखलाल मुखिया दो दिवसीय सामुहिक उपवास पर बैठे और सैकडो लोग समर्थन मे रहे

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख

बेतिया/बैरिया, (मोहन सिंह)। विकास के तमाम दावों/जुमलेबाजी के बीच बिहार आज भी देश के निर्धनतम राज्यों में शामिल है। भूमिहीनता और आवासहीनता में राज्य की तस्वीर भयावह है। राज्य की करीब 30 फीसदी आबादी जहां दशकों से रह रही है , उस जमीन का मालिकाना कागज उन्हें नहीं मिला है । यह पूरी आबादी भाजपा सरकार के बुलडोजर आतंक के साये में जी रही है । दसियों हजार घरों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़ दिये गए हैं। लाखों परिवारों को उजाड़ने की तैयारी चल रही है । मुसहर , मांझी , ऋषभदेव , डोम , हलखोर , मोहर , बांतर आदि दलित महादलित बस्तियों को आजतक नियमित नहीं किया गया है , जबकि आजादी के बाद दलित बस्तियों और मजदूरों के लिए पीएच एक्ट 1947 का गिफ्ट मिला था। इसका उद्देश्य था जमींदारों , रैयतों , सरकारी जमीन पर बसे भूमिहीनों को बासगीत पर्चा देना। उक्त बातें अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा व भाकपा माले द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय घोषणा के आलोक में बैरिया प्रखंड कार्यालय के समक्ष दो दिवसीय भूख हड़ताल के दौरान आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते माले नेता व पूर्व जिला पार्षद सुनील कुमार राव ने कहा। उन्होंने कहा जमींदारपरस्त राजनीति और भू-नौकरशाही ने इस कानून की धार को कमजोर कर दिया। 1980 और 1990 के दशक में भूमिहीनों के लिए आवासीय कॉलोनी राज्य भर में बने , जिसे बाद में बंद कर दिया गया। ऑपरेशन बसेरा की खाना पूर्ति चल रही है , जो ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।

फोटो : मोहन सिंह

भाकपा माले अंचल सचिव व मुखिया संघ के अध्यक्ष नवीन कुमार ने कहा अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) और भाकपा माले ने प्रखंड और अंचल कार्यालयों में दाखिल खारिज, परिमार्जन में जारी लूट,दलित गरीबों को वास आवास अधिकार सं वंचित करने व बैरिया के नीतिश नगर के वर्षों से बसे लोगों क लिए प्रस्तावित बंदोबस्ती को लटकाने के खिलाफ धारावाहिक आंदोलन चलाने का फैसला किया है । इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा मासिक पेंशन 3000 रुपये करने , ग्रामजी कानून के तहत काम देने , काम का उचित दाम देने , राशन कार्ड के लिए बने आधार को बदल कर सभी जरूरतमंदों को राशन देने , पेयजल के लिए पूरे राज्य में हो रहे हाथापाई की समस्या को दूर करने , राज्य के अकुशल मजदूरों के लिए दैनिक न्यूनतम मजदूरी 700 रुपये करने और इसे सख्ती से लागू करने आदि मांगों को लेकर स्वतंत्रता दिवस के पूर्व बैरिया अंचल/प्रखंड पर 13-14 अगस्त को 24 घंटे का अनशन/सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया गया है। आजादी के दशकों बाद गांव के दलित वंचितों की बदहाली बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं । भाकपा माले नेता जोखू चौधरी ने कहा खेग्रामस और भाकपा माले का यह आंदोलन छात्र-युवाओं के ऐतिहासिक आंदोलन के बाद गांव गरीबों का साझा आंदोलन अंचल/जिला के बाद राजधानी में होगा । इस आंदोलन से सरकारी विद्यालयों को नवोदय विद्यालय के स्तर पर विकसित करने और अपेक्षित कक्षा निर्माण एवं शिक्षकों की भर्ती के मुद्दे भी उठाये जायेंगे। मौके पर बिनोद कुशवाहा, मंगल चौधरी, अशोक कुशवाहा, ठाकुर साह, सुरेंद्र साह, अखिलेश प्रसाथ, योगेंद्र चौधरी, अशोक मुखिया, छोटे मुखिया, शिवप्रसन मुखिया, बाली चौधरी बिनोद प्रसाद आदि मौजूद थे।

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