रिपोर्ट : बेतिया डेस्क, 27 अक्टूबर 2026
बाल अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। क्रिश्चियन क्वार्टर, संत माइकल्स स्कूल, क्रिश्चियन क्वार्टर, बेतिया में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पश्चिम चंपारण तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के सुरक्षित बचपन अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा, संरक्षण और कानूनी सहायता के प्रति जागरूक करना तथा समाज में बच्चों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने का संदेश देना था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सत्य प्रकाश शुक्ल उपस्थित रहे। उनके साथ श्री हिंदू कुमार सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए। विद्यालय के निदेशक श्री सुनील सिरिल, उपनिदेशिका श्रीमती नूतन सिरिल तथा प्रधानाचार्या श्रीमती पुष्पा चौबे की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्या पुष्पा चौबे ने किया। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षित बचपन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इसमें बच्चों के कानूनी अधिकारों, शारीरिक सुरक्षा, भावनात्मक स्वास्थ्य, शिक्षा, सम्मान, जागरूकता तथा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में परिवार, विद्यालय और समाज की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य अतिथि सत्य प्रकाश शुक्ल ने बाल अधिकारों और कानूनी संरक्षण पर दिया जोर
मुख्य अतिथि सत्य प्रकाश शुक्ल ने सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत बच्चों के अधिकारों और कानूनी संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक बच्चे को शोषण, हिंसा, दुर्व्यवहार और भेदभाव से सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता आवश्यक है। बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देना तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी सहायता तक पहुंच सुनिश्चित करना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहने और किसी भी अनुचित व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करने का संदेश दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बाल संरक्षण के लिए कानून, प्रशासन, विद्यालय और समाज के बीच समन्वय आवश्यक है।
निदेशक सुनील सिरिल ने सुरक्षित वातावरण को बताया उज्ज्वल भविष्य की नींव
विद्यालय के निदेशक श्री सुनील सिरिल ने बच्चों के विकास में सुरक्षित वातावरण की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे बिना डर के अपनी बात रख पाते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलते हैं, तभी उनकी प्रतिभा का सही विकास होता है। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों के प्रति सहयोगपूर्ण व्यवहार अपनाने तथा उन्हें सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की अपील की।
उपनिदेशिका नूतन सिरिल ने भावनात्मक सुरक्षा और सम्मान को बताया जरूरी
विद्यालय की उपनिदेशिका श्रीमती नूतन सिरिल ने बच्चों की भावनात्मक सुरक्षा, आत्मसम्मान और मानसिक सहजता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल शारीरिक रूप से सुरक्षित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण भी मिलना चाहिए, जहां वे बिना किसी भय या झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। उन्होंने आपसी सम्मान, समानता और संवेदनशील व्यवहार को सुरक्षित बचपन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने यह संदेश दिया कि बच्चों की बात सुनना, उनकी भावनाओं को समझना और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना उनके व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है।
प्रधानाचार्य पुष्पा चौबे ने विद्यालय और अभिभावकों की भूमिका पर डाला प्रकाश
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती पुष्पा चौबे ने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विद्यालय और अभिभावकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सतर्कता, संवाद और सही मार्गदर्शन आवश्यक हैं। शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों, उनकी चिंताओं और समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को अनुशासन के साथ-साथ विश्वास, सहयोग और सम्मान का वातावरण भी मिलना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों को अपनी समस्याएं खुलकर बताने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की, ताकि समय रहते उन्हें उचित सहायता प्रदान की जा सके।
विद्यार्थियों को जागरूक करने पर दिया गया विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को समझाया गया कि सुरक्षित बचपन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने, किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या अनुचित व्यवहार की स्थिति में विश्वसनीय वयस्क से सहायता लेने तथा दूसरों की सुरक्षा और सम्मान का ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया गया। शिक्षकों ने भी बच्चों के अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, आपसी सम्मान और जिम्मेदार व्यवहार के महत्व को समझाने में सहयोग दिया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय, प्रशासन और समाज का साझा दायित्व है।
सुरक्षित बचपन अभियान : विचार और संदेश
विचार : “बचपन सुरक्षित होगा, तभी भविष्य सशक्त होगा।”
विशेष कोट : “हर बच्चे को मिले सुरक्षा और सम्मान, यही है एक सशक्त समाज की पहचान।”
प्रेरणादायक संदेश : “बच्चों की मुस्कान की रक्षा करना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने का संकल्प है।” संत माइकल्स स्कूल में आयोजित यह कार्यक्रम सुरक्षित बचपन के महत्व को समझाने तथा बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय पहल रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, सम्मान, उचित मार्गदर्शन और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। बच्चों की सुरक्षा के प्रति सामूहिक प्रयास ही एक जागरूक, संवेदनशील और सुरक्षित समाज का निर्माण कर सकते हैं।

