रिपोर्ट : छपरा डेस्क, 30 अक्टूबर 2026
टार्ल पद्धति से उम्र और कक्षा नहीं, सीखने की क्षमता के आधार पर होगी पढ़ाई; 60 दिनों की कार्ययोजना तैयार
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
सीवान, (संवाददाता)। पचरूखी प्रखंड के गांधी स्मारक उच्च विद्यालय में प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की ओर से विकसित ‘सही स्तर पर शिक्षण’ (टार्ल) पद्धति को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें शिक्षकों को बच्चों की उम्र और कक्षा के बजाय उनके वास्तविक सीखने के स्तर के अनुसार पढ़ाने की तकनीक बताई गई। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में पठन, समझ, मौखिक अभिव्यक्ति और बुनियादी गणितीय कौशल को मजबूत करना है। प्रशिक्षक सच्चिदानंद तिवारी ने बताया कि टार्ल पद्धति पारंपरिक रटंत शिक्षा से अलग है। इसके तहत कक्षा चार से आठ तक के बच्चों का प्रारंभिक आकलन कर भाषा और गणित की दक्षता के आधार पर अलग-अलग समूह बनाए जाते हैं। अक्षर, शब्द, अनुच्छेद और कहानी पढ़ने के साथ अंक पहचान, जोड़-घटाव और भाग की क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। प्रशिक्षक जयप्रकाश सिंह और राकेश कुमार सिंह ने बताया कि करीब 60 दिनों के विशेष शैक्षणिक चक्र के माध्यम से बच्चों को उनकी मूल कक्षा के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके लिए शैक्षणिक खेल, रोल प्ले, शब्द चक्र और संख्या चार्ट जैसी गतिविधियों का सहारा लिया जाएगा। शिक्षक श्रीकांत ने कहा कि यह पहल निपुण भारत मिशन के बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता अभियान को भी मजबूती देगी। कार्यशाला में र जिला रिसोर्स पर्सन पूनम तिवारी, साक्षी देवी, गुड्डू कुशवाहा, अलका राजपूत, विक्रांत पांडेय, धनंजय साह, नीलू कुमारी, लक्ष्मी देवी, अमूल कुमार, रहबर रजा, रविशंकर प्रसाद, दमयंती कुमारी, शुभांगी शर्मा, अमरनाथ, राजीव रंजन, सुनील साह, प्रतिभा कुमारी, किरण कुमारी और वीरेंद्र सिंह सहित सैकड़ों शिक्षक-प्रशिक्षु उपस्थित थे।

