रिपोर्ट : छपरा डेस्क, 31 अक्टूबर 2026
भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन से लेकर नई पीढ़ी के उत्सव तक की झलक समेटे है गीत, परंपरा और आधुनिकता का दिखता है सुंदर संगम
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
छपरा, (सारण)। दीपावली देश के प्रमुख सांस्कृतिक और पारिवारिक त्योहारों में से एक है। यह पर्व रोशनी, उल्लास, आस्था और आपसी प्रेम का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, होली, छठ और सावन की तरह दीपावली पर आधारित गीतों की संख्या अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है।
ऐसे में सुप्रसिद्ध भजन गायिका तृप्ति शाक्या की मधुर आवाज में गीतकार मनोज भावुक का नया दीपावली गीत आयी दीवाली संगीत प्रेमियों के लिए एक खास सौगात बनकर सामने आया है। यह गीत दीपोत्सव की सांस्कृतिक परंपरा, पारिवारिक आत्मीयता और उत्सव के उल्लास को संगीत के माध्यम से जीवंत करने का प्रयास है। कभी राम बनके, कभी श्याम बनके जैसे लोकप्रिय भजन से देशभर में अपनी पहचान बनाने वाली गायिका तृप्ति शाक्या ने इस गीत को अपनी सुरीली आवाज से सजाया है। गीत के बोल सुप्रसिद्ध गीतकार, कवि एवं भोजपुरी सिनेमा के चर्चित अध्येता मनोज भावुक ने लिखे हैं। इसका संगीत विवेक वक्षी ने तैयार किया है। गीत के निर्माता नीरज पांडेय तथा वीडियो निर्देशक जुबैर खान हैं। यह गीत तृप्ति शाक्या के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है।
परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम :
आयी दीवाली केवल एक मनोरंजक त्योहार गीत नहीं है, बल्कि इसमें भारतीय संस्कृति और पीढ़ियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है। गीत में दादा-दादी की आत्मीय दुनिया के साथ नई पीढ़ी यानी जेन-जी के उत्साह और आधुनिक उत्सवधर्मिता को भी स्थान दिया गया है। इसके माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि समय और पीढ़ियां बदलने के बावजूद त्योहारों की मूल भावना, पारिवारिक प्रेम और सांस्कृतिक विरासत हमेशा कायम रहती है। गीत में दीपावली के उस ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंग को भी याद किया गया है, जब 14 वर्षों का वनवास पूरा करने के बाद भगवान श्रीराम माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर पूरे नगर को रोशन किया था। यही प्रसंग दीपावली के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को विशेष पहचान प्रदान करता है। गीत में आस्था, परंपरा, पारिवारिक अपनापन और आधुनिक जीवनशैली का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
मनोज भावुक के गीतों में भारतीय संस्कृति और लोकजीवन की झलक :
गौरतलब है कि दशहरा के अवसर पर भी मनोज भावुक का भगवान श्रीराम पर केंद्रित गीत – भज ले श्रीराम नाम रे मनवा, फिल्म गायिका प्रियंका सिंह की आवाज में रिलीज हुआ था, जिसे श्रोताओं की अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। मनोज भावुक साहित्य, सिनेमा और संगीत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। भोजपुरी भाषा-साहित्य और सिनेमा के इतिहास पर भी वे लंबे समय से महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उनके गीतों में भारतीय संस्कृति, लोकजीवन, पारिवारिक संबंधों और गांव की मिट्टी की खुशबू विशेष रूप से दिखाई देती है। इसी क्रम में एसआरके म्यूजिक से रिलीज फिल्म पिया का घर में भी मनोज भावुक बतौर गीतकार जुड़े हैं। फिल्म का उनका गीत ‘बेटी वो चिरइया है जिसका दो ठिकाना है, पीहर से उड़कर के ससुराल में जाना है’ बेटी की विदाई और उसके भावनात्मक संसार को बेहद मार्मिक ढंग से अभिव्यक्त करता है। दीपावली के उत्सवी माहौल में आयी दीवाली का रिलीज होना संगीत प्रेमियों के लिए एक सुखद सौगात है। तृप्ति शाक्या की मधुर आवाज और मनोज भावुक के भावपूर्ण शब्दों से सजा यह गीत दीपावली की खुशियों के साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और पारिवारिक रिश्तों की मिठास को भी स्वर देने का प्रयास करता है।

