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Post: मित्रता दिवस के अवसर पर युवाओं ने एक दूसरे को दी बधाई

मित्रता दिवस के अवसर पर युवाओं ने एक दूसरे को दी बधाई

हर साल अगस्त के पहले रविवार को भारत समेत दुनिया के कई देशों में मित्रता दिवस मनाया जाता है

पप्पू पंडित

–  अमिट लेख

पकड़ीदयाल, (संवाददाता)। हर साल अगस्त के पहले रविवार को भारत समेत दुनिया के कई देशों में मित्रता दिवस मनाया जाता है। भारतीय परंपरा मित्र का जीवन में बहुत बड़ा स्थान होता है। माता पिता और गुरू के बाद मित्र को विशेष स्थान दिया गया है। मित्र हमारे सुख-दुख के साथी होते हैं। किसी भी परिस्थिति में मित्र हमेशा साथ खड़े होते है। भारतीय परंपरा मित्रता की बहुत सारी कहानियां प्रचलित है। इन्हीं में से एक कृष्ण और सुदामा की कहानी है। जिससे हमें मित्र के प्रति ईमानदारी, त्याग और सम्मान का भाव दिखाई देता है। जब कभी मित्रता की बात होती है तो कृष्ण और सुदामा की मिसाल दी जाती है। कृष्ण सुदामा और सुदामा की दोस्ती एक मिसाल है। जब कृष्ण बालपन में ऋषि संदीपन के यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तो उनकी मित्रता सुदामा से हुई थी। कृष्ण एक राजपरिवार में और सुदामा ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए थे। परंतु दोनों की मित्रता का गुणगानपूरी दुनिया करती है। शिक्षा-दीक्षा समाप्त होने के बाद भगवान कृष्ण राजा बन गए वहीं दूसरी तरफ सुदामा के बुरे दौर की शुरूआत हो चुकी थी। बुरे दिन से परेशान होकर सुदामा की पत्नी ने उन्हें राजा कृष्ण से मिलने जाने के लिए कहा। पत्नी के जिद्द को मानकर सुदामा अपने बाल सखा कृष्ण से मिलने द्वारिका गए। जब राजा कृष्ण अपने मित्र सुदामा के आने का संदेश पाकर कृष्ण नंगे पैर ही उन्हें लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं। मित्र सुदामा की दयनीय हालत देखकर भगवान कृष्ण के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। भगवान कृष्ण ने मित्र सुदामा का पैर अपने आंसुओं से धूल दिया। य घटना भगवान कृष्ण का अपने मित्र सुदामा के प्रति अनन्य प्रेम को दशार्ता है, इसीलिए कृष्ण और सुदामा की दोस्ती की मिसाल दी जाती है।

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