रामनवमी पर विशेष…
आदिवासी समाज के धनी दोन निवासी प्रत्येक वर्ष के भांति इस वर्ष भी रात्रि मेला का भरपूर लुत्फ़ उठाएं
– जगमोहन काज़ी
अमिट लेख
हरनाटांड, (संवाददाता)। पश्चिम चंपारण जिला का आदिवासी बाहुल्य दोन क्षेत्र रामनवमी में गुलज़ार रहा। प्रसिद्ध हट्ठी माई के स्थान पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ और भावपूर्ण पूजन विधि इस स्थान के महत्त्व को बरबस हीं बयान करता नज़र आया। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष रामनवमी के उपलक्ष्य में पिपरा दोन में वृहत मेला लगता है। इस मेला के निमित्त जंगल में रहने वाले आदिवासी समाज मेला से पूर्व पूजा कमेटी का गठन करते है।
और, ईमानदारी पूर्वक सभी सदस्य अपनी अपनी जिम्मेवारियों को निभाते भी हैं। मेला में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कमेटी सदस्य जी तोड़ मेहनत करते हैं। रामनवमी तिथि की रात्रि से मेला का आयोजन प्रारम्भ हो जाता है, जो, आगामी तीन दिनों तक आकर्षण का केंद्र रहता है। इस वर्ष जायसवाल परिवार ने भक्ति भाव से मेला में, विशाल भंडारा आयोजित किया है, ताकि दूर दूर से आये श्रद्धालुओं को मेला में भुखे नहीं रहना पड़े। ऐसी मान्यता है की हट्ठी माता के स्थान पर यदि कोई श्रद्धालु मंगल कामना सच्चे हृदय से करता है तो उसकी मुरादें शीघ्र पूरी हो जाती है, यहीं, कारण भी है की प्रत्येक नवरात्रि में यहाँ, मन्नत के चढ़ावे से, दरबार सज जाता है। ग्रामीणों की मानें, तो कभी सुदूर और भयंकर प्रतीत होनेवाला दोन क्षेत्र में जब से एसएसबी का पदार्पण हुआ है, तब से रास्ते से लगायत ढेरों विकास की सम्भावनायें इस पिछड़े इलाके में कुलांचे भरने लगी है। जंगल, पहाड़ और वन्य पशुएं यहाँ के जन-जीवन के जैसे मित्र हों यहाँ के लोग विकसित नगरों और गांवों की तुलना में कहीं ढेरों सहज ज़िन्दगी बसर करते हैं, तभी तो हर आनेवाला मुसाफिर दोन में बस जाने को बेताब हो जाता है।








