नेपाल के चितवन नैशनल पार्क में जिसकी सीमा भारतीय वन क्षेत्र से भी जुड़ी है वहीँ नेपाल क्षेत्र में अवस्थित “वाल्मीकि आश्रम”में दस दिनों से रामायण महा यज्ञ प्रारम्भ है
वाल्मीकि नगर से नंद लाल पटेल की रिपोर्ट
वाल्मीकिनगर, (अमिट लेख)। थाना क्षेत्र के सीमावर्ती नेपाल एवं वाल्मीकिनगर में चैत्र नवरात्रि की धूम मची रही। रामनवमी तिथि गुरुवार को नवदुर्गा मंदिर समेत विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
वाल्मीकी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में अवस्थित नरदेवी माता स्थान, मदनपुर देवी स्थान पर जहां अहले सुबह से हीं श्रद्धालुओं का ताँता लगना शुरू हो गया था, वहीं सीमावर्ती नेपाल के नवलपरासी जिला के सत्पति देवी स्थान, गजेंद्र मोक्ष्य दिव्य धाम, त्रिवेणी एवं बर्दघाट के प्रसिद्ध काली स्थान पर रामनवमी का भव्य नज़ारा देखने को मिला।
वहीं, विख्यात माता नरदेवी के प्रांगण में बिहार के विभिन्न इलाकों समेत यूपी और नेपाल से भी भारी संख्या में भक्त पहुंचे। जहां, रामनवमी के मौके पर मां भगवती सिद्धिदात्री सिंहवाहिनी की विधि विधान से पूजन, हवन आदि अनुष्ठान आयोजित किया गया। जिसमें विशेष कर महिलाओं की भारी भीड़ रही। वहीं मंदिरों में रामनवमी को लेकर विशेष पूजा अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा महानवमी पूजन के उपरांत कन्या पूजन किया गया, जिसमें छोटी बच्चियों के पैर पूजे गए व उन्हें भोजन कराया गया। तदनुपरांत, दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया गया। इस दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में खीर-पूड़ी, चना, हलवा आदि प्रसाद का वितरण किया गया।

बताते चलें की माता सीता का शरण स्थली और लवकुश की जन्म स्थली वाल्मीकी आश्रम में भी नेपाल, बिहार और यूपी से श्रद्धालु पहुंचे थे। यहां श्री विश्व सनातन धर्म स्थापना समिति द्वारा रामायण महायज्ञ यानि अष्टयाम का आयोजन किया गया। जिसमें विश्व मर्दन शाह समेत श्री विश्व सनातन धर्म स्थापना मूल समिति काठमांडू के उपाध्यक्ष याम रायथानी, अध्यक्ष दीपक राय माझी, मंदिर निर्माण एवं संरक्षक सूखेत प्रभु श्री गंगा प्रसाद सूर्वेदी इत्यादि ने कार्यक्रम का आयोजन किया।








