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Post: सीएम नीतीश कुमार ने सांसद, विधायक समेत कई जनप्रतिनिधियों को भेजा बुलावा

सीएम नीतीश कुमार ने सांसद, विधायक समेत कई जनप्रतिनिधियों को भेजा बुलावा

प्रादेशिक ब्यूरो दिवाकर पाण्डेय की रिपोर्ट :

मुख्यमंत्री आवास में जुटे सांसद-विधायक के साथ पूर्व जन-प्रतिनिधि

न्यूज डेस्क, राजधानी पटना

दिवाकर पाण्डेय

– अमिट लेख
पटना, (विशेष ब्यूरो)। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन में लोकसभा चुनाव 2024 के सीट बंटवारे को लेकर बार-बार सवाल उठाते-उठाते अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में आ चुके हैं। राजग सरकार के मुख्यमंत्री बनने के बाद चार ही दिन बाद मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी जनता दल यूनाईटेड के नेताओं को सीएम आवास बुलाया। यह बैठक उस समय बुलाई गई, जब पूरा देश वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण लाइव देख-सुन रहा था। सीएम आवास में हुई बैठक अब खत्म हो चुकी है। बैठक में पार्टी जिलाध्यक्षों, विधायकों, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों के साथ दल के पुराने दिग्गजों को बुलाया गया था। पार्टी के ज्यादातर सांसद बजट सत्र के लिए दिल्ली में रहने के कारण नहीं आए, वैसे बैठक का विषय 2024 का लोकसभ चुनाव ही था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ जब नीतीश कुमार सूत्रधार बनकर विपक्षी एकता की कोशिश कर रहे थे, तब सीट बंटवारा उनके लिए अहम मुद्दा था। अब, जब वह वापस मोदी सरकार के साथ हैं तो 2019 के चुनावी गणित के हिसाब से सीटों पर राजग के अंदर बात करना उनकी प्राथमिकता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में राजग के घटक के नाते जदयू ने 17, भाजपा ने 17 और अविभाजित लोक जनशक्ति पार्टी ने छह सीटों पर चुनाव लड़ा था। राजग ने सामने वाले खेमे को 40-39 से शिकस्त दी थी। तब सिर्फ जदयू ने अपनी 17 में से एक सीट गंवाई थी। गुरुवार को हुई बैठक के बाद निकले नेताओं ने बताया कि सीटों को लेकर बात नहीं हुई, बल्कि पार्टी की तैयारी और राजग की सामूहिक जीत को लेकर बात की गई। साथ ही, भितरघात की आशंकाओं पर नजर रखने की ताकीद की गई। सीएम नीतीश पुरानी जगह पर बार-बार सीट बंटवारा की बात कहते रहे थे, लेकिन अभी यहां इस बारे में खुलकर कुछ नहीं कहा है। जल्द ही सीट बंटवारा नहीं हुआ तो वह कहेंगे भी। वजह यह कि 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू को 20 से ज्यादा सीटों का नुकसान कराने वाले चिराग पासवान का दावा राजग के अंदर मजबूत है। उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी और पशुपति कुमार पारस की पार्टी भी भाजपा पर दबाव बनाए हुए है।

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