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Post: मुख्यमंत्री के आगमन पर भाकपा माले ने किया आठ सवाल

मुख्यमंत्री के आगमन पर भाकपा माले ने किया आठ सवाल

बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :

बेतिया राज की जमीन पर बसें लोगों को कानूनी अधिकार की मांग से सम्बन्धित हस्ताक्षर युक्त आवेदन पत्र मुख्यमंत्री को सौपा जाएगा

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

बेतिया, (मोहन सिंह)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेतिया आगमन पर भाकपा माले और बेतिया राज भूमि अधिकार संघर्ष मोर्चा की बैठक आइटीआइ बुध्दा कालोनी में हुई। बैठक में संयोजक संजय यादव, जितेंद्र राम, दिलीप श्रीवास्तव, सदाम अंसारी, सीताराम शर्मा, सगीर मियां, मुरारी श्रीवास्तव, मनोज बारी, अरूण तिवारी, अरूण शर्मा आदि लोग शामिल हुए बैठक में चर्चा करते हुए नेताओं ने कहा किपश्चिमी चंपारण ज़िले में स्थित आज बेतिया राज की भूमि पर वर्षों से बसे हजारों गरीब, मजदूर, दलित, पिछड़े और वंचित परिवार आज गहरे भय और असुरक्षा के साये में जी रहे हैं।

फोटो : मोहन सिंह

इन परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की खबरें न केवल अमानवीय हैं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के भी विरुद्ध हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन लोगों ने दशकों से उस भूमि को अपने श्रम से आबाद किया, पीढ़ियों से वहीं रहकर जीवन यापन किया, आज उन्हें अतिक्रमणकारी कहकर उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। दूसरी ओर, बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों को बाजार मूल्य के 10-15% पर जमीन लीज़ पर देने के लिए कानून में बदलाव की बातें सामने आ रही हैं। यह दोहरा मापदंड क्या न्यायसंगत है? संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार देता है। बिना वैकल्पिक पुनर्वास, बिना मानवीय दृष्टिकोण अपनाए हजारों परिवारों को बेघर करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि बिहार की सामाजिक न्याय की परंपरा पर भी गहरा आघात है। सरकारी जमीन पर बसें हजारों लोग पूछना चाहते हैं कि— क्या गरीबों के लिए कानून कठोर और अमीरों के लिए लचीला होगा ? यह समृद्धि यात्रा है या बुलडोजर के जरिये विनाश यात्रा बैठक में तय हुआ की बेतिया राज की जमीन पर बसें हजारों लोगों का हस्ताक्षर युक्त आवेदन पत्र दिया जाएगा। आगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आठ सवाल किया।

सवाल नंबर 1 :

माननीय मुख्यमंत्री जी भाजपा आर एस एस द्वारा संचालित आप की सरकार में पुरे बिहार में हर जिले में लाखों गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाने की योजना पर काम हो रहा है,। किसी को नोटिस भेजी जा रहीं हैं तो किसी का घर तोड़ा जा रहा है। उनकी जीवन जीविका खत्म किया जा रहा है। बिहार के गरीबों की पीढ़ी दर पीढ़ी कमाई का जो लाखों रुपये में होगी उसका विनाश कर आप कौन सी समृद्धि यात्रा कर रहे हैं।

सवाल नंबर 2 :

चम्पारण जैसे जिले में बेतिया राज की जमीन पर बसें और खेती व अन्य रोजगार कर रहे लोगों का कोर्ट ऑफ वार्डस कानून के चलते अबतक मान्यता नहीं मिल सकीं है इसका दोष जनता का है या आजादी के बाद की अबतक की बनी सरकारें?
जहां एक ओर 1885 के बंगाल- बिहार काश्तकारी अधिनियम बन जाने के बाद सर्वे हुआ और लोगों के अधिकार वाली जमीन के खता – खतियान रकबा, नक्शा, आदी का निर्धारण किया गया वही बेतिया राज के वाशियों और काश्तकारों का जमीन पर अधिकार का कोई खाता खतियान नहीं बना। बेतिया राज के लोगों की लम्बे समय से मांग भी की जमींदारी उन्मूलन के बाद जिस तरह के भूमि सम्बंधित कानून के तहत बेतिया राज की जमीन के मामलों का निर्धारण हो और कोर्ट ऑफ वार्डस खत्म किया जाय, आपकी सरकार ने अंग्रेजी जमाने की भूमि हडप्प कानून कोर्ट ऑफ वार्डस को तो खत्म किया लेकिन बिहार राज्य के भूमि सम्बंधित कानूनों से अलग हटकर बेतिया राज भूमि अधिग्रहण का अलग कानून बना कर अपने अडानी अम्बानी, रियल एस्टेट कम्पनीयों और अन्य नीजी धन्धा करने वालों के लिए लैण्ड बैंक बनाने के लिए क्या आज के जमाने का नया कोर्ट ऑफ वार्डस कानून बना दिया है❓

सवाल नंबर 3 :

ऐसा कहा जाता है कि आप समाजवादी विचारों के है, जिसकी प्रशंसा मोदी जी करते रहते हैं। क्या गरीबों- किसानों से जमीन छीन कर अडानी- अम्बानी को देने वाला कानून बना कर आपका समाजवाद आयेगा?

सवाल नंबर 4 :

आजकल बिहार में आप की सरकार उधोग- धन्नो को बढ़ावा देने की बात खूब जोर शोर से प्रचार कर रहीं हैं जिसका पहला कदम 2025 चुनाव पूर्व बिना मागे बिहार की करीब 1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते में 10-10 हजार भेज कर किया जा चुका है। एक एक गाँव में सैकड़ों महिलाओं को पैसे दिये गये हैं, उनमें से कितने महिलाओं ने लधु और कुटीर उधोग 10 हजार में सुरूवात किया है आज समृद्धि यात्रा में बतायेगे?
हम सभी जानते हैं कि 10 हजार में को लधु व कुटीर उधोग नहीं शुरू हो सकता/ तब आप की सरकार ने सरकारी खजाने का दुरूपयोग क्या वोट खरीददारी के लिए नहीं किया? जो आज 31 दिसम्बर के बाद उस योजना को बंद भी कर दिया गया है।

सवाल नंबर 5 :

आपकी सरकार कुछ बडे़ उधोग और एक करोड़ रोजगार देने की बात कर रहीं हैं। चम्पारण में चनपटिया चीनी मिल बंद पडीं है, कुमार बाग का स्टील प्लांट बंद हैं, मोतिहारी, चकिया चीनी मिल बंद हैं। मोतिहारी चीनी मिल की जमीन का तो भाजपा जदयू के नेता बंदरबांट कर रहे हैं, और सरकार उधोग धन्धो के नाम पर लैण्ड बैंक बनाने के लिए गरीबों किसानों को बेदखल करने में लगी है, चनपटिया के गुरवलिया में बिना रजिस्ट्री खर्च के प्रकाश झा को सैकड़ों एकड़ जमीन चीनी मिल खोलने के नाम पर दी गयी है। लेकिन कोई उधोग धन्धा शुरू नहीं हुआ। रामनगर में 450 एकड़ जमीन जो हरिनगर चीनी मिल के कब्जे में है उसे तत्कालीन जिला पदाधिकारी श्री राहुल सिंह ने आप की सरकार को अधिग्रहित करने का प्रस्ताव दिया था जिसको लटका कर रखा गया है, सरकार ऐसी जमीनों का बिहार में उधोग धन्धो के विकास के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल करना चाहती है। बिहार और केन्द्र की सरकार रोजगार के लिए हर विभाग के खाली पदों पर भर्ती क्यों नहीं करना चाहती है।

सवाल नंबर 6 :

पूरे बिहार में सर्वे का काम अपने अंतिम दौर में है जहां देश की आज़ादी के बाद सभी अनाधिकृत बसावटो का बंदोबस्त करने का कानून बना लेकिन आज भी बिहार के अधिकांश गरीब बंचित बस्तियाँ अनाधिकृत है, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा कहना कि एक एक इंच सरकारी जमीन खाली कराया जाऐगा यानी गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की योजना पर अमल कर रहीं हैं।

सवाल नंबर 7 :

मुख्यमंत्री जी आप तो समाजिक न्याय में विश्वास करते हैं आपके महागठबंधन वाली सरकार में दलितों पिछडों आदिवासियों के आरक्षण बढाने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कराया था क्या आज फिर नये सिरे से 65% आरक्षण बढाने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित करा कर संविधान के नौवीं अनुसूची में डाल लाने का काम करेंगे

सवाल नंबर 8 :

आप कहते हैं कि बिहार लोकतंत्र की जननी है लेकिन आऐ दिन बिहार में आप के सरकार में शामिल नफरती विचारों के कारण मॉब लिंचिंग के शिकार नवादा के अतहर अंसारी जैसे गरीब फेरी वाले निर्दोष लोग हो रहें हैं। यह कौन सा लोकतंत्र है।

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