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डॉ. अज्म का काव्य संग्रह ‘पेंसिल के निशां’ साहित्य की दुनिया में छोड़ेगा अमिट छाप

छपरा से हमारे प्रमंडलीय ब्यूरो का संकलन : 

विद्वानों की समालोचना व भव्य मुशायरे के साथ लोकार्पण समारोह संपन्न

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

संवाददाता

– अमिट लेख
छपरा, (सारण)। माया नगरी मुंबई के चर्चित गीतकार एवं छपरा निवासी डॉ. मोअज्जम अज्म के द्वितीय काव्य संग्रह ‘पेंसिल के निशां’ का लोकार्पण रविवार को करीमचक स्थित राहत पैलेस में गरिमामय वातावरण में किया गया। इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों और साहित्यकारों ने पुस्तक पर सारगर्भित समालोचना प्रस्तुत की और इसे साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

फोटो : संवाददाता

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा काव्य संग्रह का लोकार्पण कर किया गया। भाषाविद जुनैद मीर ने कहा कि “पेंसिल के निशान भले मिट जाते हों, लेकिन डॉ. मोअज्जम अज्म की रचनाओं के निशान शाश्वत हैं।” उन्होंने कहा कि किसी भी कला—चाहे शोध कार्य हो, पेंटिंग हो या कोई योजना—उसकी शुरुआत पेंसिल से होती है। उसी प्रकार डॉ. अज्म की रचनाएँ विभिन्न पड़ाव पार कर परिपक्वता को प्राप्त हुई हैं। लगभग चार दशकों का उनका साहित्यिक सफर उनकी विनम्रता और निरंतर सृजनशीलता का प्रमाण है। जेपीयू के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. मजहर किबरिया ने कहा कि डॉ. मोअज्जम ने अपने संग्रह में जो हौसला और संवेदनशीलता दिखाई है, उससे निराश मन को नई ऊर्जा मिलेगी तथा जिले की साहित्यिक धरोहर में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि आज के समय में ऐसे आयोजन अत्यंत प्रासंगिक हैं। प्रो. अब्दुस्सलाम अंसारी ने कहा कि डॉ. मोअज्जम अपनी रचनाधर्मिता से राज्य, देश व फिल्म जगत में सारण का नाम रोशन कर रहे हैं। उनकी रचनाएँ कलात्मकता, बौद्धिकता, आधुनिकता और उम्मीद का संदेश लिए हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन ने सामाजिक एकता और भाईचारे को भी मजबूत किया है। राजेंद्र कॉलेज के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. अलाउद्दीन खान ने साहित्यिक दृष्टिकोण से डॉ. अज्म की सेवाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सारण की मिट्टी में वह विशेषता है कि यहां से मोअज्जम जैसे लोग पैदा होते हैं, जो पूरे देश को प्रेम और एकता का संदेश देते हैं। प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. मुश्ताक अहमद ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि डॉ. मोअज्जम न केवल एक बेहतरीन शायर हैं, बल्कि एक उत्कृष्ट इंसान और चिंतक भी हैं। उन्होंने कहा कि उनके माध्यम से इतने सकारात्मक विचार वाले लोगों का एकत्र होना इस आयोजन की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि डॉ. अज्म का साहित्यिक सफर आगे और चमकेगा तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी वे सारण की नुमाइंदगी करेंगे। वरीय शायर शहजाद अहमद ने अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एस.एम. रफीक आज़म द्वारा लिखित प्रस्तावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। साथ ही यह भी बताया कि प्रसिद्ध फिल्म गीतकार एवं शायर शकील आज़मी ने भी इस पुस्तक का परिचय लिखा है, जो महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मेजबान डॉ. मोअज्जम अज्म ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर जगदम कॉलेज के विभागाध्यक्ष प्रो. हसीबुर्रहमान के शानदार संचालन और डॉ. यूएस विश्वकर्मा की अध्यक्षता में मुशायरा भी आयोजित किया गया। मुशायरे में नजमुल्लाह नज्म, मोहित कुमार, मोईज बहमनबरवी, अज्ञात, प्रो. शमीम परवेज, दक्ष निरंजन शंभू, राकेश कुमार फौजी, सुरेश चौबे, ऐनुल बरौलवी, बैतूल्लाह बैत, डॉ. समद भयंकर, रवि भूषण हंसमुख, जुनैद, अफरोज हैदर, चांद उस्मानी चौपट, शाहिद जमाल और प्रो. शकील अनवर समेत कई कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाएँ प्रस्तुत कीं। मौके पर जेपीयू के प्रॉक्टर डॉ. विश्वामित्र पांडेय, प्रो. भगवान पांडेय, एडवोकेट मंजूर अहमद, सैयद परवेज हुसैन, डॉ. शहजाद आलम, एहसान आलम अरसलान सहित अनेक साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

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