AMIT LEKH

Post: 15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

छपरा से हमारे उप-संपादक का संकलन : 

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, दुर्लभ सिद्धि योगों में साधना का मिलेगा कई गुना फल: ज्योतिषाचार्य ज्ञानेंद्र अवस्थी

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

रिपोर्ट : मोहम्मद रियाज सिद्दीकी
नैमिषारण्य/सीतापुर, (यूपी)। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाली गुप्त नवरात्रि इस वर्ष 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई को नवमी तिथि पर पारायण एवं पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगी। ज्योतिषाचार्य ज्ञानेंद्र अवस्थी के अनुसार इस बार की गुप्त नवरात्रि अत्यंत दुर्लभ और सिद्धिदायिनी मानी जा रही है, क्योंकि पूरे नवरात्रि काल में कई शुभ एवं प्रबल योगों का संयोग बन रहा है। इन योगों में की गई देवी आराधना, जप, तप, हवन, मंत्र-साधना, दान एवं अनुष्ठान का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होगा।
ज्योतिषाचार्य श्री अवस्थी ने बताया कि इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, पुष्कर योग, जय सिद्धि योग तथा शुक्र नन्दा सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके अलावा अष्टमी पर सिद्धि योग और नवमी पर साध्य योग का भी विशेष संयोग रहेगा, जिसे साधना और आध्यात्मिक सिद्धि के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। उन्होंने बताया कि वर्ष में चार नवरात्रियां आती हैं। चैत्र और शारदीय (आश्विन) नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस अवधि में सामान्य पूजा के साथ तंत्र, मंत्र, योग और विशेष साधनाओं का विशेष महत्व होता है। गुप्त नवरात्रि में नवदुर्गा के साथ दस महाविद्याओं की आराधना का विधान है, जिससे साधकों को आध्यात्मिक शक्ति, शत्रु विजय, धन, ऐश्वर्य, ज्ञान और मनोवांछित सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
उन्होंने बताया कि इस गुप्त नवरात्रि में विशेष रूप से मां वाराही और मां शाकम्भरी की पूजा का विशेष महत्व है। मां वाराही की उपासना से अकाल मृत्यु, भय, शत्रु बाधा और ग्रहजनित संकटों से रक्षा होती है, जबकि मां शाकम्भरी की कृपा से अन्न, धन, सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त :

इस वर्ष गुप्त नवरात्रि का प्रथम दिन बुधवार होने के कारण अभिजीत मुहूर्त राहुकाल से प्रभावित रहेगा, इसलिए इसे कलश स्थापना के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। श्रद्धालुओं को प्रातः 6:00 बजे से 9:00 बजे के बीच कलश स्थापना कर देवी पूजन प्रारंभ करने की सलाह दी गई है।

दस महाविद्याएं और उनका महत्व :

मां काली – शत्रु विनाश, निर्भयता और मोक्ष प्रदान करने वाली।
मां तारा – संकटों से रक्षा, ज्ञान और जीवन की संरक्षिका।
मां त्रिपुर सुंदरी (षोडशी) – सौभाग्य, सौंदर्य, ऐश्वर्य एवं समस्त सिद्धियों की अधिष्ठात्री।
मां भुवनेश्वरी – सुख-समृद्धि, प्रतिष्ठा और समस्त जगत की अधिष्ठात्री।
मां छिन्नमस्ता – अहंकार का नाश, आत्मबल और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने वाली।
मां भैरवी – साहस, तेज, तप, साधना और शत्रु विजय की देवी।
मां धूमावती – रोग, दरिद्रता, विपत्ति और दुर्भाग्य का नाश करने वाली।
मां बगलामुखी – शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और शक्ति को स्तंभित करने वाली।
मां मातंगी – वाणी, संगीत, विद्या, बुद्धि और राजसम्मान प्रदान करने वाली।
मां कमला – धन, वैभव, लक्ष्मी कृपा, सुख और समृद्धि की अधिष्ठात्री।

ज्योतिषाचार्य ज्ञानेंद्र अवस्थी ने श्रद्धालुओं से गुप्त नवरात्रि के दौरान पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध आचरण और नियमपूर्वक देवी आराधना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा है कि इस पावन काल में किए गए दुर्गा सप्तशती पाठ, श्रीसूक्त, लक्ष्मी साधना, जप, तप, हवन तथा दस महाविद्याओं की उपासना से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं और साधक को देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

Leave a Reply

Recent Post