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Post: 9 वर्षों की जुदाई खत्म, पति एवं बच्चों से हुआ भावुक पुनर्मिलन

9 वर्षों की जुदाई खत्म, पति एवं बच्चों से हुआ भावुक पुनर्मिलन

संकलन : उप-संपादक बेतिया

पति एवं बच्चों की आंखों से छलक पड़े खुशी के आंसू

सखी वन स्टॉप सेंटर बेतिया ने लिखी खुशियों की नई कहानी

महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास के लिए पूरी संवेदनशीलता से काम कर रहा है सखी वन स्टॉप सेंटर – रोचना माद्री

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़ 

–  अमिट लेख

बेतिया, (मोहन सिंह)। 9 वर्षों की लंबी जुदाई, अनगिनत उम्मीदें और अंततः खुशी के आंसुओं से भरा मिलन। पश्चिम चम्पारण के सखी वन स्टॉप सेंटर, बेतिया की संवेदनशील पहल ने वर्ष 2017 से बिछुड़ी एक महिला को उसके पति और परिवार से मिलाकर एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ दिया। आज 31 जुलाई को वरीय उप समाहर्ता-सह-नोडल पदाधिकारी, सखी वन स्टॉप सेंटर, श्रीमती रोचना माद्री की उपस्थिति में महिला को विधिवत उसके पति के सुपुर्द किया गया। इस दौरान भावनात्मक माहौल देखने को मिला। वर्षों बाद एक-दूसरे को सामने देखकर पति-पत्नी की आंखें नम हो गईं। परिवार के सदस्यों ने सखी वन स्टॉप सेंटर और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वरीय उप समाहर्ता-सह-नोडल पदाधिकारी, सखी वन स्टॉप सेंटर, श्रीमती रोचना माद्री ने कहा कि सखी वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य केवल संकटग्रस्त महिलाओं को आश्रय देना ही नहीं, बल्कि उन्हें उनके अधिकार, सुरक्षा और सम्मान के साथ समाज से पुनः जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि यह मामला मानवीय संवेदनाओं का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक समन्वय और टीमवर्क के कारण वर्षों से बिछड़ा परिवार फिर से एक हो सका। उन्होंन कहा कि यह पुनर्मिलन न केवल एक परिवार की खुशियों की वापसी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक संवेदनशीलता, विभिन्न राज्यों के समन्वय और मानवीय प्रयासों से वर्षों पुरानी दूरियां भी समाप्त की जा सकती हैं। केन्द्र प्रशासक, सखी वन स्टॉप सेंटर, श्रीमती रश्मि कुमारी ने बताया कि कर्नाटक स्थित वन स्टॉप सेंटर से सूचना मिली कि वहां सुषमा नाम की एक महिला रह रही है, जो केवल अपने पति का नाम और गांव का नाम ही बता पा रही थी। सूचना मिलते ही सखी वन स्टॉप सेंटर, बेतिया की टीम ने जांच शुरू की। पड़ताल में पता चला कि महिला द्वारा बताया गया गांव गोपालपुर थाना क्षेत्र में स्थित है। इसके बाद गोपालपुर थाना से संपर्क कर स्थानीय स्तर पर सत्यापन कराया गया, जिसमें महिला की पहचान सही पाई गई। इसके उपरांत फरवरी 2026 में सुषमा के पति मनोज गिरी को सखी वन स्टॉप सेंटर, बेतिया बुलाया गया और कर्नाटक स्थित सेंटर से वीडियो कॉल कराई गई। स्क्रीन पर अपनी पत्नी को देखते ही मनोज गिरी भावुक हो उठे और खुशी से बोले-यही मेरी पत्नी है। उन्होंने तत्काल प्रशासन से पत्नी और बच्चों को सुरक्षित वापस लाने का अनुरोध किया। ग्राम-विशम्भरा, थाना-गोपालपुर, पोस्ट-दुखीछापर, प्रखंड-सिकटा निवासी मनोज गिरी ने बताया कि उनका विवाह 28 फरवरी 2005 को सुषमा के साथ हुआ था। वर्ष 2017 में उनकी पत्नी अचानक एक बच्चे को लेकर घर से चली गई थी। उस समय परिवार में चार बच्चे थे और सुषमा गर्भवती भी थीं। उन्होंने बताया कि पत्नी की काफी खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतने के साथ उन्हें लगने लगा कि शायद उनकी पत्नी अब इस दुनिया में नहीं रही। ऐसे में जब अचानक सखी वन स्टॉप सेंटर, बेतिया से फोन आया कि उनकी पत्नी जीवित है और कर्नाटक में सुरक्षित है, तो उन्हें अपनी खुशी पर विश्वास ही नहीं हुआ। मनोज गिरी द्वारा पहचान की पुष्टि होने के बाद सखी वन स्टॉप सेंटर, बेतिया ने सुपरिटेंडेंट, स्टेट होम फॉर वूमन, उडुपी (कर्नाटक) से पत्राचार कर महिला को सुरक्षित पश्चिम चम्पारण भेजने का अनुरोध किया। आवश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद सुषमा को प्रशासनिक अभिरक्षा में बेतिया लाया गया। शनिवार को सखी वन स्टॉप सेंटर में सभी औपचारिकताएं पूरी कर वरीय उप समाहर्ता-सह-नोडल पदाधिकारी श्रीमती रोचना माद्री की उपस्थिति में सुषमा को उनके पति मनोज गिरी के सुपुर्द कर दिया गया। केन्द्र प्रशासक ने बताया कि मनोज गिरी की दो बेटियां वर्तमान में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी), कर्नाटक की देखरेख में हैं। उन्हें भी शीघ्र पश्चिम चम्पारण लाकर परिवार से मिलाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

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