रिपोर्ट : विशेष ब्यूरो, पटना
पेटीएम और पाइन लैब्स जैसी फिनटेक कंपनियों को होगा भारी मुनाफा
जनवरी 2020 से ग्राहकों और दुकानदारों के लिए पूरी तरह मुफ्त रही यह सेवा अब संशोधित नियमों के दायरे में आ सकती है
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
पटना, (दिवाकर पाण्डेय)। देश में चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक डिजिटल पेमेंट की क्रांति लाने वाला यूपीआई (UPI) अब एक बड़े वित्तीय बदलाव के मुहाने पर है। जनवरी 2020 से ग्राहकों और दुकानदारों के लिए पूरी तरह मुफ्त रही यह सेवा अब संशोधित नियमों के दायरे में आ सकती है। इकोनॉमिक्स टाइम्स और ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार पेमेंट कानूनों में संशोधन की तैयारी कर रही है। इसके तहत ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर 15 से 30 बेसिस पॉइंट का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी प्रोसेसिंग शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे सीधे रिजर्व बैंक (RBI) को MDR तय करने का अधिकार मिल जाएगा। राहत की बात यह है कि इस संभावित फैसले से आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के छोटे-मोटे डिजिटल भुगतान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आंकड़े बताते हैं कि ₹2,000 से बड़े यूपीआई पेमेंट कुल लेनदेन की संख्या (वॉल्यूम) का महज 4 प्रतिशत ही हैं। हालांकि, कुल लेनदेन के मूल्य (वैल्यू) में इनकी हिस्सेदारी 67 प्रतिशत तक है। यही वजह है कि बड़ी रकम वाले इन चुनिंदा भुगतानों पर एमडीआर लगाने से पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बहुत बड़ा राजस्व आधार तैयार होगा। जेफरीज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2028 तक यह कदम डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए ₹5,000 से ₹10,000 करोड़ का नया बाजार तैयार कर सकता है। नए शुल्क से मिलने वाला राजस्व बैंकों, मर्चेंट एक्वायरर और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के बीच विभाजित होगा। पेमेंट एग्रीगेटर ऐप्स को अपनी सेवाओं के बदले 5 से 10 बेसिस पॉइंट तक का हिस्सा मिल सकता है। मार्केट में मजबूत पकड़ रखने वाली कंपनी पेटीएम (Paytm) को इससे ₹300 से ₹700 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है, जिससे उसके शुद्ध मुनाफे में 15 से 35 प्रतिशत तक का उछाल आ सकता है। इसी तरह, पाइन लैब्स (Pine Labs) को भी ₹50 से ₹150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई होने की संभावना जताई जा रही है। लगातार बढ़ते डिजिटल लेनदेन के बावजूद यूपीआई सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां मुख्य बिजनेस से कोई मुनाफा न हो पाने के कारण लंबे समय से वित्तीय संकट का सामना कर रही थीं। शून्य-शुल्क मॉडल पर ट्रांजैक्शन प्रोसेस करना, मर्चेंट जोड़ना और साइबर सुरक्षा पर भारी खर्च करना कंपनियों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा था। ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के अनुसार, ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर न्यूनतम चार्ज लगाने से इंडस्ट्री को सालाना ₹3,000 करोड़ का शुद्ध लाभ होगा। यह कदम बाजार में अस्वास्थ्यकर प्राइस-वॉर को रोकेगा और कंपनियों को अपना सुरक्षा ढांचा मजबूत करने में मदद करेगा।








