संकलन : के.के. सिंह सेंगर, उप-संपादक छपरा
सारण में जुलाई में 18,498 मरीजों ने लिया ऑनलाइन चिकित्सकीय परामर्श, 349 हेल्थ सेंटर बने स्पोक और 19 केंद्रों पर डॉक्टरों के हब
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
छपरा, (सारण)। अब ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बार-बार अस्पतालों की दौड़ नहीं लगानी पड़ रही है। गांव के नजदीक स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर मरीज सीधे डॉक्टर से ऑनलाइन जुड़ रहे हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी बीमारी की जानकारी देकर चिकित्सकीय परामर्श प्राप्त कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ई-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी सेवा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सारण जिले में इस डिजिटल स्वास्थ्य सेवा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जिले में 19 हब और 349 स्पोक संचालित किए जा रहे हैं। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को स्पोक तथा पीएचसी और सीएचसी को हब बनाया गया है। स्पोक सेंटर पर तैनात सीएचओ मरीजों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हब पर मौजूद चिकित्सकों से जोड़ते हैं। इसके बाद डॉक्टर मरीज की समस्या सुनकर आवश्यक दवा, जांच और आगे के इलाज के संबंध में परामर्श देते हैं।
जुलाई में 18,498 मरीजों को मिला ऑनलाइन इलाज :
ई-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते भरोसे का अंदाजा जुलाई माह के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। जुलाई में सारण जिले में कुल 18,498 मरीजों ने टेली कंसल्टेंसी सेवा का लाभ लिया। इनमें सबसे अधिक मरीजों को ऑनलाइन चिकित्सकीय परामर्श देने वालों में दिघवारा सीएचसी के डॉ. रौशन कुमार सबसे आगे रहे। उन्होंने अकेले 3,296 मरीजों को ऑनलाइन चिकित्सकीय परामर्श दिया। वहीं अमनौर सीएचसी के डॉ. शशांक शुभम ने 2,999 मरीजों को टेली कंसल्टेंसी के माध्यम से चिकित्सकीय सलाह दी। तीसरे स्थान पर मांझी सीएचसी के डॉ. रोहित कुमार रहे, जिन्होंने 1,872 मरीजों को ऑनलाइन परामर्श उपलब्ध कराया। इस सेवा के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सकों तक ग्रामीण मरीजों की पहुंच आसान हुई है। खासकर वैसे मरीज, जिन्हें सामान्य बीमारी के लिए प्रखंड या जिला मुख्यालय तक आने में समय और पैसे खर्च करने पड़ते थे, उन्हें अब अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से ही डॉक्टर की सलाह मिल रही है।
ऐसे मिलती है डॉक्टर से ऑनलाइन सलाह :
टेली मेडिसिन सेवा का लाभ लेने के लिए मरीज को अपने गांव के नजदीकी स्वास्थ्य उपकेंद्र या हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जाना होता है। वहां एएनएम या सीएचओ मरीज का पंजीकरण करने के बाद उसकी प्राथमिक जानकारी लेते हैं। इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मरीज को हब पर बैठे डॉक्टर से जोड़ा जाता है।
डॉक्टर मरीज से बीमारी के लक्षण और अन्य जरूरी जानकारी लेते हैं। आवश्यकता पड़ने पर जांच की सलाह दी जाती है और उपचार के लिए दवाएं लिखी जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया से मरीज को सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए गांव से दूर अस्पताल जाने की जरूरत कम हो जाती है।
ग्रामीणों के समय और पैसे दोनों की बचत :
टेली कंसल्टेंसी का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण मरीजों को मिल रहा है। पहले सामान्य बीमारी के लिए भी कई मरीजों को प्रखंड या जिला मुख्यालय तक जाना पड़ता था। आने-जाने में समय और पैसे दोनों खर्च होते थे। अब गांव के नजदीक स्वास्थ्य केंद्र पर ही डॉक्टर से संपर्क हो जाने के कारण मरीजों को काफी राहत मिल रही है।
ग्रामीण की सुने…
मांझी प्रखंड के मटियार निवासी रामजी महतो ने बताया कि पहले डॉक्टर को दिखाने के लिए प्रखंड मुख्यालय जाना पड़ता था। आने-जाने में पूरा दिन निकल जाता था। अब गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर ही डॉक्टर से वीडियो कॉल के माध्यम से बात हो जाती है और दवा व जांच के बारे में जानकारी मिल जाती है। इससे काफी सुविधा हुई है।
ग्रामीण-शहरी डिजिटल स्वास्थ्य अंतर को पाटने की कोशिश :
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि ई-संजीवनी एबी-एचडब्ल्यूसी टेली-परामर्श सेवा का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की दूरी को कम करना है। हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत ग्रामीण स्तर पर संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को चिकित्सकीय हब से जोड़ा गया है। हब पर एमबीबीएस, विशेषज्ञ और जरूरत के अनुसार सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से ही उच्च स्तर के चिकित्सकीय परामर्श तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है। साथ ही आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को भी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में मदद मिल रही है।
अधिक से अधिक मरीजों को लाभ पहुंचाने पर जोर :
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टेली कंसल्टेंसी को और प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को इसके बारे में जागरूक किया जा रहा है। सीएचओ और एएनएम की भूमिका भी इसमें महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे मरीजों को डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श लेने की प्रक्रिया में सहयोग करते हैं। जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीसी रमेश चंद्र कुमार ने बताया कि ई-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के लिए काफी उपयोगी सेवा साबित हो रही है। विभाग का प्रयास है कि मरीजों को उनके घर के नजदीक ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो। जिले में 19 हब और 349 स्पोक के माध्यम से सेवा संचालित की जा रही है। जुलाई में 18,498 मरीजों का टेली कंसल्टेशन होना इस सेवा की स्वीकार्यता को दर्शाता है। आने वाले समय में अधिक से अधिक मरीजों को इससे जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
हब-एंड-स्पोक मॉडल से मजबूत हो रही व्यवस्था :
ई-संजीवनी सेवा हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम करती है। इसमें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्पोक के रूप में काम करते हैं, जबकि पीएचसी और सीएचसी स्तर पर बनाए गए हब पर चिकित्सक मरीजों को ऑनलाइन परामर्श देते हैं। इस व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों को चिकित्सकीय हब से डिजिटल माध्यम से जोड़ा जाता है। बहरहाल, इसका सीधा फायदा यह है कि ग्रामीण मरीजों को सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होती है। वहीं गंभीर या विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होने पर डॉक्टर मरीज को उचित स्वास्थ्य संस्थान में रेफर करने की सलाह भी दे सकते हैं। इस तरह ई-संजीवनी ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों तक पहुंच आसान बनाने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से गांव तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।








