AMIT LEKH

Post: भाई-बहन के प्रेम के साथ रक्षा, विश्वास और संस्कारों का पवित्र पर्व है रक्षाबंधन : डॉ. के. के. चतुर्वेदी

भाई-बहन के प्रेम के साथ रक्षा, विश्वास और संस्कारों का पवित्र पर्व है रक्षाबंधन : डॉ. के. के. चतुर्वेदी

संकलन :छपरा डेस्क, उप-संपादक 

माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई बनाया और उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को वैकुंठ वापस ले जाने का आग्रह किया। राजा बलि ने बहन की इच्छा स्वीकार की

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख

आलेख : डॉ. के.के. चतुर्वेदी

एकमा, (सारण)। संस्कृत शिक्षक एवं ज्योतिष विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने रक्षाबंधन के पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास, कर्तव्य, समर्पण और रक्षा-संकल्प की भारतीय परंपरा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि बहन राखी बांधते समय भाई के सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायु और सर्वत्र विजय की कामना करती है। वहीं भाई बहन की रक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है। इस प्रकार रक्षा सूत्र दोनों के बीच अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक बन जाता है। डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि रक्षाबंधन की पौराणिक परंपरा राजा बलि और माता लक्ष्मी से भी जुड़ी हुई है। भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा के अनुसार राजा बलि के सुतल लोक में भगवान विष्णु के द्वारपाल बनने के बाद माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई बनाया और उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को वैकुंठ वापस ले जाने का आग्रह किया। राजा बलि ने बहन की इच्छा स्वीकार की। उन्होंने बताया कि रक्षा सूत्र बांधते समय प्रचलित मंत्र है: “येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।“ डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा। उनके अनुसार इस दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पर्व परिवार और समाज में प्रेम, सम्मान तथा संस्कारों को मजबूत करता है। बदलते समय में भी इस पर्व की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने में इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि राखी का धागा छोटा जरूर है, लेकिन इसमें प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और रक्षा का बहुत बड़ा संकल्प समाहित है। यही रक्षाबंधन का वास्तविक संदेश है।

डॉ. के.के.चतुर्वेदी

Leave a Reply

Recent Post