AMIT LEKH

Post: छपरा सदर अस्पताल में क्लबफुट के उपचार पर चिकित्सकों मिला बेसिक मेडिकल ट्रेनिंग

छपरा सदर अस्पताल में क्लबफुट के उपचार पर चिकित्सकों मिला बेसिक मेडिकल ट्रेनिंग

रिपोर्ट : उप-संपादक, छपरा डेस्क

– प्रशिक्षित डॉक्टरों के जरिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बच्चों तक पहुंचाया जाएगा निःशुल्क उपचार
– अब सरकारी अस्पताल में मिलेगा क्लबफुट का बेहतर इलाज
– जन्मजात पैर की विकृति से जूझ रहे बच्चों के लिए राहत

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख

छपरा, (संवाददाता)। जन्मजात पैर की विकृति यानी क्लबफुट से जूझ रहे बच्चों को समय पर और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में सारण से एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। सदर अस्पताल, छपरा में अनुष्का फाउंडेशन फॉर एलिमिनेटिंग क्लबफुट की ओर से क्लबफुट उपचार पर बिहार का पहला बेसिक मेडिकल ट्रेनिंग आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत चिकित्सकों की क्षमता को मजबूत करना और क्लबफुट से पीड़ित बच्चों को उनके नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में उचित उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। प्रशिक्षण का नेतृत्व मास्टर ट्रेनर डॉ. शुभ लाल ने किया। इस दौरान डॉ. आलोक कुमार सिन्हा और डॉ. रवि कुमार अमृत ने प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रशिक्षण सत्र में क्लबफुट की पहचान, उपचार की प्रक्रिया तथा उपचार के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय कौशल से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया।

सरकारी अस्पतालों में उपचार की पहुंच बढ़ाने पर जोर :

क्लबफुट जन्म के समय बच्चों में दिखाई देने वाली पैर की एक ऐसी विकृति है, जिसका समय पर उपचार नहीं होने पर बच्चे को आगे चलकर चलने-फिरने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, समय पर पहचान और उचित उपचार से अधिकांश मामलों में बच्चे सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम हो सकते हैं। इसी उद्देश्य से AFEC सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली के साथ मिलकर पोंसेटी मेथड के माध्यम से निःशुल्क क्लबफुट उपचार की पहुंच मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। संस्था का जोर केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की पहचान से लेकर उपचार की निरंतरता तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

डॉक्टरों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की भी अहम भूमिका :

क्लबफुट से प्रभावित बच्चों की जल्द पहचान और उन्हें उपचार तक पहुंचाने में डॉक्टरों के साथ-साथ RBSK टीम, DEIC, आशा कार्यकर्ता, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। AFEC सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ समन्वय कर इस पूरी प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है, ताकि जन्मजात पैर की विकृति वाले बच्चों की पहचान शुरुआती स्तर पर ही हो सके और उन्हें समय पर उपचार मिल सके। प्रशिक्षण के माध्यम से चिकित्सकों के चिकित्सकीय ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। इससे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में क्लबफुट उपचार की सुविधा को अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बिहार में क्षमता निर्माण की शुरुआत :

सदर अस्पताल में आयोजित यह प्रशिक्षण बिहार में AFEC की मेडिकल क्षमता निर्माण गतिविधियों की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के डॉक्टरों को क्लबफुट उपचार के लिए प्रशिक्षित किए जाने से राज्य में एक ऐसा चिकित्सकीय नेटवर्क विकसित करने में मदद मिलेगी, जिसके माध्यम से बच्चों और उनके परिवारों को उपचार के लिए दूर-दराज के केंद्रों पर निर्भरता कम हो सकेगी। AFEC पूरे भारत में सरकारी स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ मिलकर क्लबफुट से जन्मे बच्चों की पहचान, उपचार और उपचार की निरंतरता को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहा है। छपरा में आयोजित बेसिक मेडिकल ट्रेनिंग इसी व्यापक प्रयास की बिहार में शुरुआती कड़ी है। संस्था का लक्ष्य सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के भीतर प्रशिक्षित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता को बढ़ाकर क्लबफुट उपचार को बच्चों और उनके परिवारों के लिए अधिक सुलभ बनाना है। सदर अस्पताल, छपरा में हुई यह पहल आने वाले समय में बिहार में क्लबफुट उपचार की सेवाओं को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Leave a Reply

Recent Post