रिपोर्ट : बेतिया डेस्क
बाढ़ की स्थायी समस्या, किसानों की डूबी फसल और विस्थापित परिवारों को लेकर भाजपा सरकार पर बरसे कांग्रेस विधायक; बोले—पहले बिहार के घरों में चूल्हा जलाइए, फिर दिया जलाने की बात कीजिए
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर भाजपा द्वारा मनाए जा रहे ‘सेवा पखवाड़ा’ और ‘आशीर्वाद का दिया’ जलाने की अपील पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “दिया क्यों जलवा रहे हैं? आप बिहार से बाढ़ की समस्या स्थायी रूप से दूर कर दीजिए, हम पूरे बिहार में आपके लिए दिवाली मनाएंगे।”

उन्होंने कहा कि आज बिहार के गांव, घर और खेत बाढ़ में डूबे हैं, हजारों परिवार विस्थापित हैं और किसान अपनी बर्बाद फसल देखकर परेशान हैं। ऐसे समय में सरकार को जश्न और प्रचार से ज्यादा बाढ़ पीड़ितों की चिंता करनी चाहिए। अभिषेक रंजन ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे हो गए और बिहार में भाजपा-एनडीए की लंबे समय से सरकार है, फिर भी बिहार को बाढ़ की स्थायी समस्या से अब तक निजात क्यों नहीं मिली? उन्होंने चुनाव के दौरान अमित शाह द्वारा बिहार को बाढ़ से निजात दिलाने के किए गए वादे का उल्लेख करते हुए पूछा कि आज जब बिहार के अनेक जिले बाढ़ की चपेट में हैं, तो उस वादे का क्या हुआ? उन्होंने कहा कि पश्चिम चंपारण के योगापट्टी, बैरिया, नौतन समेत कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर है। कई गांवों में लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।

कहीं लोग अपने हाथों से घर तोड़कर सामान निकाल रहे हैं, तो कहीं किसान अपनी आंखों के सामने फसल को बर्बाद होते देख रहे हैं। ऐसे संकट के समय भाजपा के कितने सांसद, विधायक और नेता बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे, कितने परिवारों की सुध ली और कितनों को राहत दिलाई, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। कांग्रेस विधायक ने कहा कि भाजपा नेताओं को दिया जलाने की चिंता है, लेकिन “पहले बिहार की जनता के घर में चूल्हा जलाइए, बाढ़ में डूबे परिवारों को बचाइए और किसानों की फसल बचाइए।” उन्होंने कहा कि केवल राहत की घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। बाढ़ नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक नीति, तटबंधों की मजबूती, नदियों का वैज्ञानिक प्रबंधन, जलनिकासी और प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर ठोस काम करना होगा। उन्होंने कहा कि हर चुनाव में बिहार को बाढ़ से निजात दिलाने का वादा किया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही वही बिहार फिर बाढ़ में डूब जाता है। “जनता अब वादे नहीं, परिणाम चाहती है।” अभिषेक रंजन ने सरकार के विकास के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगह सड़कें जर्जर हैं, किसानों को फसल क्षति का मुआवजा समय पर नहीं मिल रहा, स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल हैं तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आम लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास का फैसला सरकार के विज्ञापन से नहीं, जमीन पर जनता की स्थिति से होगा। जनता देख रही है कि चुनाव के समय कौन वादा करता है और संकट के समय कौन उसके साथ खड़ा रहता है। अंत में अभिषेक रंजन ने कहा, “आप दिया जलाइए, ताली बजवाइए और अपना प्रचार कीजिए, लेकिन जनता के सवालों से नहीं बच सकते। पत्रकार सवाल पूछ रहे हैं तो जवाब दीजिए, जनता सवाल पूछ रही है तो जवाब दीजिए और बाढ़ पीड़ित सवाल पूछ रहे हैं तो उसका भी जवाब दीजिए। अगर बिहार से बाढ़ की समस्या दूर कर दें, किसानों की फसल बचा दें, युवाओं को रोजगार दें, शिक्षा-स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था सुधार दें—हम आपके लिए दिवाली मनाने को तैयार हैं। लेकिन केवल दिया जलाने और प्रचार करने से बिहार की जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता। बिहार की जनता अब सब समझ चुकी है।


