रिपोर्ट : बेतिया डेस्क, 31 अक्टूबर २०26
अब गांव-गांव में जागरूकता की अलख जगाएंगी जीविका दीदियां
एनीमिया, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था और कैंसर की समय पर पहचान पर जोर, जीविका कर्मियों को किया गया प्रशिक्षित
स्वास्थ्य संजीवनी प्रशिक्षण के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचेगी स्वास्थ्य जागरूकता की पहल
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वस्थ शिशु के बेहतर विकास और गरिमामय वृद्धावस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जीविका कर्मियों का तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नील गंगा होटल, बेतिया में संपन्न हुआ।
फोटो : मोहन सिंहस्वास्थ्य संजीवनी विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण में महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, प्रजनन स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान और बचाव से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षक मृत्युंजय कुमार ने महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) के लक्षणों की पहचान, इसके दुष्परिणाम और बचाव के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संतुलित एवं विविधतापूर्ण आहार के माध्यम से एनीमिया के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके लिए हरी पत्तेदार साग-सब्जियां, दालें तथा विटामिन-सी से भरपूर आंवला, संतरा, नींबू और अमरूद जैसे खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने की सलाह दी गई।
छाया : अमिट लेखउन्होंने महिलाओं के निजी स्वास्थ्य, प्रजनन संबंधी समस्याओं तथा इन समस्याओं के नवजात शिशुओं पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों की भी जानकारी दी। प्रशिक्षण में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था एवं उच्च जोखिम वाले नवजात की पहचान, समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य जीविका कर्मियों को इस योग्य बनाना है कि वे समुदाय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर सकें और जरूरतमंद महिलाओं एवं बच्चों को उचित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ सकें।
छाया : अमिट लेखइस अवसर पर जीविका के प्रबंधक, स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता, सतीश कुमार ने महिलाओं में गैर-संचारी रोगों, विशेषकर स्तन कैंसर एवं गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, की समय पर पहचान और जांच के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन रोगों के शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूकता, समय पर जांच और उचित चिकित्सकीय परामर्श से उपचार की संभावनाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने जीविका कर्मियों से अपील की कि वे ग्रामीण समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता को प्राथमिकता दें तथा महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित करें। प्रशिक्षण के तहत पश्चिम चंपारण जिले में जीविका के 57 एच.एन. एम.आर.पी. एवं 272 सी.एन.आर.पी. को संबंधित विषयों पर प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षित कैडर की जिम्मेदारी होगी कि वे जीविका स्वयं सहायता समूहों एवं ग्राम संगठनों के माध्यम से जीविका दीदियों को स्वास्थ्य, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूक करें। आवश्यकता पड़ने पर वे महिलाओं एवं बच्चों को नजदीकी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर अथवा अन्य उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने में भी सहयोग करेंगे। इसके साथ ही जीविका के संबंधित कर्मियों द्वारा इन गतिविधियों का नियमित एवं प्रभावी अनुश्रवण किया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य संबंधी संदेश समुदाय तक पहुंचे और जरूरतमंद परिवारों को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।

