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Post: सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से हो रहा अतिक्रमण

सरकारी जमीन पर धड़ल्ले से हो रहा अतिक्रमण

बगहा से हमारे संवाददाता की रिपोर्ट : 

हास्यास्पद तो यह कि ऐसे में जो भी मामला पुलिस थाने तक पहुँचता रैयतदारों और अतिक्रमणकारियों के बीच कानूनी दाँव-पेंच से ओत-प्रोत साँप-सीढ़ी का खेल शुरू हो जाता

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

बगहा, (भगवान सिंह)। बगहा में सरकारी जमीन को अवैध रूप से बेचने और अतिक्रमण कर झोपड़ी बनाने का मामला सामने आया है। दरअसल बगहा दो प्रखंड के मंगलपुर औसानी पंचायत के बाड़ी डोडी औसानी गांव में स्थित राजकीय मध्य विद्यालय औसानी के पास तिरहुत नहर से निकले माइनर किनारे सरकारी जमीन का अतिक्रमण किया जा रहा है। इस संबंध में उक्त गांव के लोगों के द्वारा पठखौली थाने में आवेदन दिया गया है। जिसमें बताया गया है कि गैरमजरूआ जमीन पर कुछ लोगों के द्वारा झोपड़ी बनाकर अतिक्रमण किया जा रहा है। अतिक्रमणकारी किसानों के खेत में पनवट करने के लिए विभाग के द्वारा बनाए गए माइनर के बांध को काट दिया गया है। जिससे माइनर का बांध भी कमजोर हो गया है। सरकारी जमीन पर झोपड़ी बनाने वाले व्यक्ति झमन राम से जब स्थानीय लोगों के द्वारा पूछताछ किया गया कि सरकारी जमीन में किसके आदेश से घर बना रहा है, तो, उसका कहना है कि यह जमीन बदरी राम से 10 हजार में खरीदा है। गौर तलब है कि प्रशासन की अनदेखी के चलते भी सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद सरकारी जमीनों से अतिक्रमण का मामला ख़त्म होता नहीं दिख रहा। अंचल की वाद संचिकाओं पर गौर किये जाएँ तो भूमि विवाद का असली जड़ किन्हीं राजस्व कर्मचारियों की धनलोलुपता के चलते भी भूस्वामियों को अनायास मुक़दमें को निपटाने में कचहरी का चक्कर लगाने की मज़बूरी है तो जब से परिमार्जन का ढ़ोल पीटा गया गैर मजरुआ तो गैर मजरुआ आमजनों की रैयति जमीनों पर भी दखल देते हुये दलित वर्ग, बाहुबलियों अथवा महिलाओं का जत्था अतिक्रमण का स्वांग रचने से गुरेज नहीं कर रहे। हास्यास्पद तो यह कि ऐसे में जो भी मामला पुलिस थाने तक पहुँचता रैयतदारों और अतिक्रमणकारियों के बीच कानूनी दाँव-पेंच से ओत-प्रोत साँप-सीढ़ी का खेल शुरू हो जाता। ऐसे में औसानी गांव के लोग सिंचाई के प्रमुख साधन तिरहुत लघु वितरणी के जमीन से लगे सरकारी जमीनों पर हुये ऐसे अतिक्रमण से इस बात को लेकर चिंता जता रहे की शासन और कुर्सी की लड़ाई में यदि प्रशासन चूक जाये तो राम जाने भविष्य में नहरों से उपलब्ध सिंचाई की व्यवस्था किसानों को मयस्सर हो पायेगी अथवा नहीं…?

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