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रातभर गंडक पर टिकी रहीं निगाहें, नेपाल से आया पानी धीरे-धीरे हुआ कम

रिपोर्ट : न्यूज़ ब्यूरो, इंडो-नेपाल बॉर्डर

बहकर पहुंचे शव और मलबे ने बढ़ाई चिंता

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख

वाल्मीकिनगर, (संतोष कुमार)। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद त्रिशूली नदी में बढ़े जलप्रवाह का असर देर रात वाल्मीकिनगर की गंडक नदी में भी दिखाई दिया। स्थानीय जानकारी के अनुसार, रात करीब 12 से 1 बजे के बीच नेपाल की ओर से आया पानी गंडक में पहुंचना शुरू हुआ।

हालांकि लंबी दूरी तय करने के कारण यहां पहुंचते-पहुंचते पानी का प्रवाह काफी कम हो गया। नतीजा यह रहा कि वाल्मीकिनगर क्षेत्र में फिलहाल वैसी भयावह बाढ़ की स्थिति नहीं बनी, जिसकी आशंका को लेकर दिनभर लोगों में चिंता बनी हुई थी। रातभर प्रशासन और गंडक विभाग के अधिकारी पूरी तरह सतर्क रहे और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए रखी गई।

नदी में बहकर आया अजीबोगरीब सामान

पानी के साथ गंडक नदी में नेपाल की ओर से बहकर आए कई सामान भी लोगों के लिए कौतूहल और चिंता का विषय बने। स्थानीय लोगों के अनुसार नदी में मृत शव, मवेशियों के शव, गाय-भैंस और अन्य जानवरों के अवशेष सहित घरों में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बहता हुआ दिखाई दिया। इसके अलावा गैस सिलेंडर, वाहन के पहिए और विभिन्न प्रकार का घरेलू सामान भी नदी के प्रवाह के साथ वाल्मीकिनगर की ओर आते देखा गया।

रात के अंधेरे में नदी के बीच से इस तरह के सामानों का बहकर आना अपने आप में बेहद चिंताजनक दृश्य था। नेपाल में आई बाढ़ के कारण त्रिशूली नदी क्षेत्र में जन-धन के नुकसान की खबरें भी सामने आई हैं और नदी में शव मिलने की रिपोर्ट नेपाल से आई है।

पूरी रात अलर्ट रहा प्रशासन

संभावित खतरे को देखते हुए वाल्मीकिनगर में प्रशासन, पुलिस और गंडक जल संसाधन विभाग की निगरानी रातभर जारी रही। गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोले जाने और 24 घंटे निगरानी के निर्देश की भी रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि राहत की बात यह है कि स्थानीय स्तर पर देर रात के बाद पानी का प्रवाह कमजोर पड़ता गया, गंडक बराज के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जितनी आशंका प्रकट कि गई थी जल प्रवाह उतना भयानक नहीं रहा, रात्री एक से दो बजे के क्रम में नेपाल कि तबाही भरा जलप्रवाह शांत भाव में गंडक बराज पर दस्तक दिया। एक वरीय पदाधिकारी ने सेल फोने पर हुई बातचीत में “अमिट लेख”

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को जानकारी देते हुए बताया कि नेपाल से आया जल-प्रवाह अबतक अधिकतम एक लाख चालीस हज़ार क्यूसेक से एक लाख पचास हज़ार क्यूसेक के मध्य हीं आंकी गई है जिससे अब खतरे की आशंका टलती प्रतीत हो रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गंडक नदी का पानी धीरे-धीरे कम होने की सूचना है। फिलहाल वाल्मीकिनगर में बड़ी बाढ़ की स्थिति नहीं बनी है। फिर भी नेपाल से आए मलबे और नदी में बहकर आए सामान ने यह जरूर दिखा दिया कि पहाड़ों में होने वाली प्राकृतिक आपदा का असर कितनी दूर तक पहुंच सकता है। स्थानीय लोगों से नदी के किनारे अनावश्यक रूप से जाने से बचने और प्रशासन की सूचना पर ध्यान देने की अपील की जा रही है। फिलहाल खतरा टलता नजर आ रहा है, लेकिन गंडक नदी पर निगरानी अभी भी जरूरी है।

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