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Post: गांवों में नहीं हो रहा मच्छररोधी दवा का छिड़काव

गांवों में नहीं हो रहा मच्छररोधी दवा का छिड़काव

हरनाटांड क्षेत्र के गांवों में नहीं हो रहा मच्छररोधी दवा का छिड़काव ग्रामीण क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है

न्यूज़ डेस्क, बगहा ब्यूरो

जगमोहन काजी

– अमिट लेख

बगहा, (ग्रामीण)। हरनाटांड क्षेत्र के गांवों में नहीं हो रहा मच्छररोधी दवा का छिड़काव ग्रामीण क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। इनसे संक्रामक रोगों को लेकर लोगों की चिता बढ़ गई है। क्योंकि इन दिनों मलेरिया, वायरल फीवर ने भी पैर पसार रखा है। ग्रामीण क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। इनसे संक्रामक रोगों को लेकर लोगों की चिता बढ़ गई है। जैसे-जैसे गर्मी के तेवर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ता जा रहा है। नगर निगम के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी इनके आतंक से परेशान हैं। पहले तो शाम ढलने के बाद इनका हमला शुरू होता था। अब तो दिन में भी इनके डंक से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। इनके रोकथाम की बातें वालपेंटिग, पोस्टर व इश्तेहारों में सिमट कर रह गई है। जबकि हकीकत में बचाव के उपायों का कहीं नामोनिशान भी देखने को नहीं मिल रहा है। घर हो या बाहर सड़क पर, ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां मच्छरों का आतंक न हो। गर्मी के दिनों में जहां अपच और डायरिया जैसे रोग पनपते हैं, वहीं मलेरिया और वायरल फीवर भी लोगों को सताता है। लोग इस बात को लेकर आशंकित हैं कि यदि मच्छरों का प्रकोप इसी तरह बढ़ता रहा तो संक्रामक रोग लोगों को अपनी चपेट में ले लेंगे, जिससे स्थिति भयावह हो सकती है। अधिकांश लोग मलेरिया से पीड़ित हैं, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है। ग्रामीण इलाकों में डीडीटी का छिड़काव एवं फागिग कराए जाने की मांग हमें जिला प्रशासन से करना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि बहुत पहले लगभग 15 वर्ष पहले विभाग द्वारा डीडीटी व मैलाथियान का छिड़काव कराया जाता था। जिससे मच्छरों का प्रकोप कम हो जाता था। लेकिन अब इसका छिड़काव नहीं किया जा रहा है। जिससे मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है।

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