प्रसिद्ध गीतकार एवं कवि डॉ सोमनाथ ठाकुर ने कतरे से समंदर तक गुमनाम सिलसिला हूं कविता की प्रस्तुति से श्रोता हुए मंत्र मुग्ध
न्यूज़ डेस्क, पूर्वी चंपारण
दिवाकर पाण्डेय
मोतिहारी (जिला ब्यूरो )। चकिया शहर स्थित एक होटल के सभागार में गुरुवार को समाजसेवी स्व मथुरा प्रसाद के स्मृति में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन गंगा जमुनी तहजीब का एक खूबसूरत मिसाल भी पेश किया। राजस्थान के धवलपुर से आई कवित्री रजिया बेगम जिया ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की। वही प्रसिद्ध गीतकार एवं कवि डॉ सोमनाथ ठाकुर ने कतरे से समंदर तक गुमनाम सिलसिला हूं । तोड़ हजार बंधन हर कैद में रहा हूं ।कद मापने बेचैन आसमान हूं छोटी सी जिंदगी से पर मौत से बड़ा हूं । पढ़ा तो श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए तथा जमकर तालियां बजाई। वही वरिष्ठ पत्रकार सह कवि योगेंद्र नाथ शर्मा ने धूप चली डालों पर पात गिरे मौसम के।यादों के फूल छिड़क रहे हैं थम थम के। प्रस्तुत किया तो तालियों की आवाज से पूरा माहौल गुंजित हो उठी। दूसरी तरफ डॉ राजकुमार रंजन ने मैं रहता हूं जहां पर मकान के घने जंगल.जहां पसरी है सड़कें सपिनों से दिल हुए मरुस्थल। प्रस्तुत किया तो मौजूद लोग झूम उठे। वही कवित्री रजिया बेगम जिया ने हे प्रिय छोड़ न जाना जी न सकेंगे बिना तुम्हारे। प्यार किया तो प्यार निभाना तुम आंखों के तारे की प्रस्तुति ने श्रोताओं का मन मोह लिया। वहीं कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे इंजीनियर आनंद कुमार मिश्रा ने अपने काव्य पाठ के माध्यम से श्रोताओं को अध्यात्म से जोड़े रखा।इस दौरान कवियों ने श्रोताओं काव्य पाठ के चासनी में ऐसे डुबोये रखा की वक्त कैसे गुजरी कि किसी को पता नहीं चला। इस दौरान आगत कवियों व अतिथियों को कुअवां गांव निवासी अमन ट्रेडर्स के प्रोपराइटर मो इस्तेयाक आलम ने माला पहना तथा अंग वस्त्र देकर भव्य स्वागत किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो संजय गुप्ता ने आगे बड़े पैमाने पर कवि सम्मेलन कराने का संकल्प लिया। मंच संचालन का सीनियर पत्रकार जोहा अफजल ने की। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो मो रिजवान, मो कलीम, प्रकाश साह,मो हासिम,मो जामी सहित अन्य की अहम भूमिका थी।








