



ब्रांडेड कंपनियों के नकली रैपर बनाकर दवा बेचने के गोरखधंधे का भांडाफोड़ किया गया है
न्यूज़ डेस्क, पाटलिपुत्र
– दिवाकर पाण्डेय
पटना। ब्रांडेड कंपनियों के नकली रैपर बनाकर दवा बेचने के गोरखधंधे का भांडाफोड़ किया गया है। पटना सिटी अनुमंडल कार्यालय मजिस्ट्रेट व ब्रांड प्रोटेक्शन प्राइवेट लिमिटेड की संयुक्त टीम ने यह छापेमारी की है। जिसमें करोड़ों रुपये का नकली रैपर बरामद किया गया है। खास बात तो यह है कि यह रैपर एक प्रिंटिंग प्रेस की आड़ में चलायी जा रही थी। छापेमारी के बाद इलाके में हड़कंप मचा गया है. छापेमारी टीम में पटना सिटी के मजिस्ट्रेट के अलावा ब्रांड प्रोटेक्शन के सैयद मुस्तफा हुसैन, अंजनी कुमार आदि लोग शामिल थे। ब्रांड प्रोटेक्शन की गुप्त सूचना पर गठित मजिस्ट्रेट व मालसलामी थाने पुलिस की टीम ने थाना क्षेत्र के छोटी नगला संग्राम चक के किराये के एक किराए में चल रही प्रिंटिंग प्रेस में औचक छापेमारी की. जांच में पता चला कि दानापुर निवासी राजीव कुमार के नाम पर प्रिंटिंग प्रेस का संचालन किया जाता था। मौके पर टीम को शिप्ला, डिटॉल, फेविकोल हिमालय समेत दर्जनों नामी ब्रांडेड कंपनियों के करोड़ों रुपए नकली रैपर बरामद किये गये। साथ ही दुकान में कंप्यूटर सिस्टम के साथ-साथ कई तरह के रैपर बनाने के लिए कलर, मशीन आदि पाया गया हालांकि मौके से संचालक फरार हो गया। प्रशासन दुकान संचालक को नोटिस भेज जवाब मांगा है। वहीं कंपनी के मुस्तफा हुसैन ने बताया कि रैपर किस दवा कंपनी के कहने पर बनायी जाती थी और इसकी सप्लाई बिहार के किन-किन जिलों में होती थी इसको लेकर प्रशासन की टीम जांच कर रही है। संबंधित कंपनियों के अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गयी। जिसमें प्रथम दृष्टया जांच में रैपर नकली करार दिया है। इस गोरखधंधे के मुख्य सरगरना कौन है और इसका नेटवर्क कहां तक फैला है इस मामले में भी जल्द खुलासा किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी ब्रांड प्रोटेक्शन की ओर से पटना सहित पूरे बिहार में बड़े पैमाने पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये की नकली दवाएं पकड़ी जा चुकी है।