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Post: ईबीसी जनप्रतिनिधियों की बढ़ेगी मुश्किलें

ईबीसी जनप्रतिनिधियों की बढ़ेगी मुश्किलें

नगर निकाय में दिये आरक्षण के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी

न्यूज़ डेस्क,पटना  

दिवाकर पाण्डेय

अमिट लेख

पटना (विशेष ब्यूरो) : नगर निकाय चुनाव में ईबीसी को आरक्षण देने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई पूरी हो गयी है कोर्ट कभी भी फैसला सुना सकती है.अगर फैसला सरकार के खिलाफ आया तो इस कोटे से जीते हुए पार्षद से लेर महापौर और उपमहापौर की सदस्यता जा सकती है। पटना हाईकोर्ट ने राज्य में हुये नगर निकाय चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्गों को बगैर आरक्षण दिए चुनाव कराने जाने के मामले पर सुनवाई पूरी कर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।चीफ जस्टिस के विनोद चन्द्रन और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने सुनवाई की। पिछले वर्ष हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रावधानों के अनुसार तब तक स्थानीय निकायों में पिछडा वर्ग के लिए आरक्षण की अनुमति नहीं दी जा सकती,जब तक राज्य सरकार 2010 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित तीन जांच अर्हताएं पूरी नही कर लेता। कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फैसला के. कृष्णा मूर्ति, सुनील कुमार, विकास किशनराव गावली, सुरेश महाजन, राहुल रमेश वाघ और मनमोहन नागर का हवाला देते हुए राज्य के मुख्य सचिव और राज्य निर्वाचन आयुक्त को आगे की कार्रवाई करने का आदेश दिया था।साथ ही सभी अर्जी को निष्पादित कर दिया था।कोर्ट आदेश के बाद राज्य सरकार ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को समर्पित आयोग के रूप में अधिसूचित किया। समर्पित आयोग के रिपोर्ट को राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया गया और आयोग ने उस रिपोर्ट के आधार पर अति पिछड़ा वर्ग के लिए सीट आरक्षित कर नगर निकाय चुनाव कराने के लिए अधिसूचना जारी की।इसे हाई कोर्ट में अर्जी दायर कर चुनौती दी गई।इसी मामलें पर कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रखा है। अब देखना है कि हाईकोर्ट का फैसला सरकार और ईबीसी जनप्रतिनिधियों के पक्ष में आता है या नही।

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