



सरकार ने ऐसी नियमावली क्यों बनाई जिसमें नियोजित शिक्षकों का कोई भविष्य नहीं है
नियमावली के अनुसार एसटीइटी, टीईटी, सीटेट एवं दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए अभ्यर्थियों को भी परीक्षा देनी है
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। सरकार शिक्षकों के संबंध में जारी तुगलकी फरमान शीघ्र वापस ले अन्यथा मजबूर होकर शिक्षकों को एक मंच पर आकर आंदोलन करना होगा। उक्त बातें मंगलवार को सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के नवनिर्वाचित एमएलसी अफाक अहमद ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने, आगे कहा कि सरकार ने ऐसी नियमावली क्यों बनाई जिसमें नियोजित शिक्षकों का कोई भविष्य नहीं है। और ना शिक्षकों के प्रमोशन एवं ट्रांसफर के जो नियम बनाए गए हैं उसका कोई मतलब रह जाता है।
नियमावली के अनुसार एसटीइटी, टीईटी, सीटेट एवं दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण किए हुए अभ्यर्थियों को भी परीक्षा देनी है। तब वह राज्य कर्मी होगा और पुराने शिक्षकों को भी यह परीक्षा देकर पास करना होगा। तभी वह राज्य कर्मी होंगे, क्या अभी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ बैठकर वर्तमान समय में 50 वर्ष का शिक्षण उनकी बराबरी कर पाएंगे। यह कहां का न्याय है। उन्होंने कहा कि शिक्षक संगठनों ने अपने हक के लिए पहले भी आंदोलन कर अपने भविष्य को संवारा है। उन्हें आज भी अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। शिक्षकों के पास अभी भी वक्त है, जाति धर्म एवं अलग-अलग संगठनों की राजनीति से ऊपर उठकर सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे। वर्ना समय आपको माफ नहीं करेगी। उन्होंने, कहा कि हम सभी शिक्षक संस्थाओं से आह्वान करते हैं, कि सभी शिक्षक संघ संगठित होकर। समन्वय स्थापित कर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के नेतृत्व में संघर्ष करें।